41 साल बाद फिर रचा गया इतिहास: शुभांशु शुक्ला की उड़ान ने फिर दिलाई राकेश शर्मा की याद

भारत का अंतरिक्ष सफर: राकेश शर्मा से शुभांशु शुक्ला तक
एक ऐतिहासिक यात्रा-भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम हमेशा से ही गर्व और प्रेरणा का स्रोत रहा है। राकेश शर्मा से लेकर शुभांशु शुक्ला तक, कई वीरों ने अंतरिक्ष में भारत का परचम लहराया है। इस लेख में हम इस अद्भुत यात्रा पर एक नज़र डालेंगे।
राकेश शर्मा: भारत का पहला अंतरिक्ष यात्री-1984 में, राकेश शर्मा ने ‘सोयूज़ टी-11 मिशन’ के ज़रिए अंतरिक्ष में कदम रखा। उन्होंने अंतरिक्ष में सात दिन से ज़्यादा समय बिताया और कई वैज्ञानिक प्रयोग किए। उनके मिशन ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक नई ऊँचाई दी। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से अंतरिक्ष के अनुभव के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा था, ‘सारे जहां से अच्छा’, जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
अंतरिक्ष में शोध और प्रयोग-राकेश शर्मा का मिशन सिर्फ़ एक यात्रा नहीं थी, बल्कि कई वैज्ञानिक प्रयोगों से भरा हुआ था। उन्होंने माइक्रोग्रैविटी के प्रभावों, योग के लाभों और पृथ्वी के अवलोकन पर शोध किया। रूसी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर किए गए इन प्रयोगों ने भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान को एक नया आयाम दिया।
शुभांशु शुक्ला: एक नई शुरुआत-41 साल बाद, शुभांशु शुक्ला ने Axiom-4 मिशन के ज़रिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा की। यह भारत के लिए एक और गौरवशाली क्षण था। शुभांशु की उपलब्धि राकेश शर्मा की विरासत को आगे बढ़ाती है और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के उज्जवल भविष्य का संकेत देती है।
एक शांत जीवन, एक महान योगदान-आज राकेश शर्मा एक शांत जीवन जी रहे हैं। हालांकि मीडिया से दूर, लेकिन वो इसरो की गगनयान परियोजना में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। उनका अनुभव और मार्गदर्शन नई पीढ़ी के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए प्रेरणा है।
भविष्य की उड़ानें-राकेश शर्मा और शुभांशु शुक्ला की उपलब्धियों ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। यह सिर्फ़ तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय गौरव और आशा का प्रतीक है। आने वाले समय में, भारत अंतरिक्ष अनुसंधान में और भी बड़ी उपलब्धियाँ हासिल करेगा।



