छत्तीसगढ़ में फेनीटोन इंजेक्शन पर बैन: मरीजों की जान से खिलवाड़ या सिस्टम की सतर्कता?

छत्तीसगढ़ में फेनीटोन इंजेक्शन की सप्लाई पर रोक: क्या है पूरा मामला?-छत्तीसगढ़ में मिर्गी और दिमागी चोट के मरीज़ों के लिए ज़रूरी दवा फेनीटोन इंजेक्शन की सप्लाई अचानक रोक दी गई है। दिल्ली की एक कंपनी के इंजेक्शन की क्वालिटी पर सवाल उठने के बाद ये फैसला लिया गया है। आइए जानते हैं पूरी कहानी।
गुणवत्ता पर उठे सवाल-छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (CGMSC) ने दिल्ली की कंपनी सिस्टोकेम लेबोरेटरी से मिले फेनीटोन इंजेक्शन के एक बैच की क्वालिटी पर सवाल उठाए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में इस बैच को सब-स्टैंडर्ड बताया गया था। इसके बाद CGMSC ने तुरंत एक्शन लिया और सप्लाई रोक दी। अस्पतालों में पहले से मौजूद स्टॉक भी वापस मंगा लिया गया है।
क्या है असली बात?-जांच में पाया गया कि जिस बैच (CPY2503) की सप्लाई हुई थी, वो पाउडर की जगह लिक्विड फॉर्म में था। लेकिन इंडियन फार्माकोपिया (IP) के मुताबिक फेनीटोन पाउडर फॉर्म में होना चाहिए। दूसरे बैच (CPY2502) की जांच में सब कुछ ठीक पाया गया। इससे साफ है कि क्वालिटी में बैच टू बैच अंतर है। इसीलिए इस बैच को सब-स्टैंडर्ड माना गया है।
मरीज़ों की सुरक्षा सबसे पहले-फेनीटोन एक ज़रूरी इंजेक्शन है जिसका इस्तेमाल मिर्गी के दौरे, ब्रेन इंजरी और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं में होता है। इसकी क्वालिटी में कोई कमी मरीज़ों के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है। CGMSC ने मरीज़ों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये कदम उठाया है।
कंपनी को चेतावनी-CGMSC ने दिल्ली की कंपनी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है और सख्त चेतावनी दी है। इंजेक्शन की दोबारा जांच की जा रही है। अगर दूसरी जांच में भी सब-स्टैंडर्ड रिपोर्ट आती है, तो कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फेनीटोन का इस्तेमाल कैसे और कहाँ?-फेनीटोन एक एंटी-एपिलेप्टिक दवा है। इसका इस्तेमाल लगातार दौरे, ब्रेन ऑपरेशन, हेड इंजरी और कुछ खास दिल की समस्याओं में किया जाता है। यह दवा तुरंत असर करती है और मरीज की जान बचाने में मदद करती है।
क्या सीख मिलती है?-यह घटना दवाओं की क्वालिटी पर फिर से सवाल उठाती है। CGMSC का तुरंत एक्शन काबिले तारीफ है, लेकिन ज़रूरी है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। दवा कंपनियों को क्वालिटी पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए और मरीज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।



