क्या ‘हिंदू आतंकवाद’ पर फिर छिड़ी सियासत? मालेगांव ब्लास्ट बरी फैसले के बाद नया संग्राम

मालेगांव बम धमाका: राजनीति का नया मोड़-मालेगांव बम धमाके के सभी आरोपियों को बरी करने के फैसले ने महाराष्ट्र की राजनीति में तूफान ला दिया है। भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं, और ‘हिंदू आतंकवाद’ की बहस फिर से छिड़ गई है।
भाजपा का आरोप: वोट बैंक की राजनीति?-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने वोट बैंक की राजनीति के लिए ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि 9/11 के बाद ‘इस्लामिक आतंकवाद’ के उभरने पर कांग्रेस ने ‘हिंदू आतंकवाद’ का नैरेटिव बनाया। फडणवीस ने कांग्रेस से पूरे हिंदू समाज से माफ़ी मांगने की मांग की और इस फैसले को हिंदू समाज की जीत बताया। उनका मानना है कि कांग्रेस ने राजनीतिक फायदे के लिए हिंदुओं को बदनाम किया।
कांग्रेस का पलटवार: एनआईए की विफलता?-कांग्रेस ने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और एनआईए पुख्ता सबूत पेश करने में नाकाम रही। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने महात्मा गांधी की हत्या का उदाहरण देते हुए कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार हाई कोर्ट में अपील करेगी? कांग्रेस का मानना है कि राजनीतिक दबाव में जांच एजेंसियों ने अपना काम ठीक से नहीं किया।
शिंदे का तंज: ‘भगवा आतंकवाद’ का झूठा प्रचार?- उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कांग्रेस पर ‘भगवा आतंकवाद’ का झूठा प्रचार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से हिंदू समाज पर लगा कलंक मिट गया है। शिंदे ने कहा कि आरोपियों ने बहुत कष्ट सहा है और इस अन्याय को हिंदू समाज कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक फायदे के लिए हिंदुओं को बदनाम करने का आरोप लगाया।
आगे क्या? अपील या राजनीतिक मुद्दा?- अब देखना है कि क्या महाराष्ट्र सरकार बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील करेगी। भाजपा इसे हिंदू समुदाय के लिए जीत मान रही है, जबकि कांग्रेस जांच एजेंसियों की विफलता पर सवाल उठा रही है। यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है और आगे क्या होता है, यह देखना बाकी है।


