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चीन-अमेरिका ट्रेड डील में पेंच: रूस-ईरान से तेल खरीद को लेकर बढ़ा तनाव

अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता: तेल आयात पर बनी पेंच!-चीन और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता में कई मुद्दों पर सहमति बनने की उम्मीद है, लेकिन रूस और ईरान से तेल आयात को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद गहराता जा रहा है। अमेरिका चाहता है कि चीन इन देशों से तेल खरीदना बंद कर दे, लेकिन चीन का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा उसके राष्ट्रीय हित से जुड़ी है और इस पर कोई समझौता नहीं होगा।

 चीन का अड़ा रुख: ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि-दो दिन की वार्ता के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर साफ कर दिया कि वो अपनी ऊर्जा आपूर्ति को राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर सुनिश्चित करेगा। मंत्रालय ने कहा, “दबाव या धमकी से कुछ नहीं होगा। चीन अपनी संप्रभुता और विकास के हितों की रक्षा करेगा।” यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच सकारात्मक संकेत दिख रहे थे और व्यापार बाधाओं में कमी की उम्मीद थी।

 अमेरिकी दबाव और चीन की चुनौती-अमेरिका की ओर से 100% टैरिफ लगाने की धमकी के बावजूद चीन ने झुकने से इनकार कर दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने कहा कि रूस से तेल खरीद पर चीन के लिए समझौता करना मुश्किल होगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि बातचीत जारी है और जल्द ही कोई समाधान निकल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी ऊंची टैरिफ नीति अमेरिका के अपने हित में भी नहीं होगी, क्योंकि इससे अब तक हुई प्रगति रुक सकती है।

रूस-ईरान से तेल आयात: चीन की निर्भरता-चीन के लिए रूस और ईरान से तेल आयात बेहद महत्वपूर्ण है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान द्वारा निर्यात किए जाने वाले तेल का 80-90% हिस्सा चीन को जाता है। चीन रोजाना लगभग 10 लाख बैरल ईरानी तेल आयात करता है। इसी तरह, रूस से भी चीन बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है। अप्रैल 2024 में चीन का रूसी तेल आयात 20% बढ़कर 13 लाख बैरल प्रति दिन हो गया था।

भारत पर भी निगाहें: रूस से तेल खरीद-सिर्फ चीन ही नहीं, भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर भी अमेरिका ने चिंता जताई है। अमेरिका ने भारत से आने वाले माल पर टैरिफ लगाने की घोषणा की है। भारत ने जवाब में कहा कि उसके रूस के साथ संबंध मजबूत हैं। अमेरिका के एक वरिष्ठ सलाहकार ने कहा कि अमेरिका को इस बात का सामना करना होगा कि भारत और चीन दोनों ही रूस से लगभग बराबर मात्रा में तेल खरीद रहे हैं, जिससे यूक्रेन युद्ध की फंडिंग जारी है।

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