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उपराष्ट्रपति चुनाव से बाहर हुई BRS: क्यों लिया पार्टी ने अहम फैसला?

उपराष्ट्रपति चुनाव से BRS का बड़ा ‘नो एंट्री”

BRS का चौंकाने वाला फैसला: उपराष्ट्रपति चुनाव से बनाई दूरी!-भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने हाल ही में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में भाग न लेने का एक बड़ा ऐलान किया है। यह खबर इसलिए भी खास है क्योंकि BRS के राज्यसभा में चार सांसद हैं, और ऐसे में उनका यह कदम काफी चर्चा का विषय बन गया था। जहाँ एक ओर INDIA गठबंधन ने अपना उम्मीदवार उतारा था, वहीं YSRCP और BRS दोनों ही किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा नहीं बने थे, जिसने सबको थोड़ा सोचने पर मजबूर कर दिया था। लेकिन अब BRS के इस फैसले ने पूरे चुनावी माहौल को और भी ज़्यादा दिलचस्प बना दिया है, मानो किसी फिल्म का क्लाइमेक्स हो!

KTR ने खोला राज़: क्यों लिया ये फैसला?-BRS के कार्यकारी अध्यक्ष, के. टी. रामा राव (KTR) ने इस फैसले के पीछे की वजह साफ कर दी है। उनका कहना है कि यह मुकाबला असल में NDA और INDIA गठबंधन के बीच है, न कि उम्मीदवारों के बीच। उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर तेलंगाना के किसानों की समस्याओं, खासकर यूरिया की कमी, को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया। पिछले 20 दिनों से इस मुद्दे पर चेतावनी दी जा रही थी, लेकिन कोई हल नहीं निकला। KTR ने बताया कि 71 लाख किसानों के समर्थन में और इस अनदेखी के विरोध में पार्टी इस चुनाव से दूर रह रही है। अगर ‘नोटा’ का विकल्प होता, तो BRS उसे ही चुनती।

कांग्रेस का तीखा वार: क्या BRS दे रही BJP को मदद?-तेलंगाना कांग्रेस के नेताओं ने BRS के इस कदम को उनकी घटती राजनीतिक पकड़ से जोड़कर देखा है। उनका कहना है कि जो पार्टी कभी 17 में से 11 लोकसभा सीटें जीतती थी, आज उसकी हालत शून्य पर आ गई है। 2019 में 9 सीटें मिली थीं, लेकिन 2024 में एक भी नहीं। राज्यसभा में भी उनकी संख्या सात से घटकर चार रह गई है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहकर BRS अप्रत्यक्ष रूप से BJP को फायदा पहुंचा रही है। इसकी तुलना आम आदमी पार्टी (AAP) से की गई है, जिसने कांग्रेस से कई मुद्दों पर मतभेद होने के बावजूद INDIA उम्मीदवार को वोट देने का फैसला किया।

YSRCP का NDA को खुला समर्थन!-दूसरी तरफ, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने NDA के उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन को अपना पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है। पार्टी प्रमुख वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी ने खुद न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी को फोन करके उनका सम्मान तो जताया, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे पहले ही NDA को समर्थन देने का वादा कर चुके हैं। YSRCP के पास संसद के दोनों सदनों में कुल 11 सीटें हैं, और उनके सांसदों ने NDA उम्मीदवार के पक्ष में वोट डालने की पूरी तैयारी कर ली है। YSRCP के इस कदम से चुनाव में समीकरण और भी ज़्यादा स्पष्ट हो गए हैं।

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