“अखिलेश यादव का भाजपा सरकार पर वार: ‘लोकतंत्र की हत्या’ का गंभीर आरोप, बरेली जाने से रोका गया सपा दल”

अखिलेश यादव का तीखा प्रहार: भाजपा सरकार पर लोकतंत्र को कुचलने का आरोप-अखिलेश यादव, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, ने एक बार फिर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने शनिवार को भाजपा सरकार पर “लोकतंत्र की हत्या” करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए लोकतंत्र का गला घोंट रही है।
बरेली में सपा नेताओं को रोकने पर बवाल-अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को बरेली जाने से रोक दिया, जो कि बेहद निंदनीय है। शनिवार को, जब सपा नेता बरेली जाने की कोशिश कर रहे थे, तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे को उनके लखनऊ स्थित आवास से बाहर निकलते ही रोक लिया गया। पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि कई सांसदों, पूर्व सांसदों और विधायकों सहित पार्टी के सभी प्रतिनिधियों को घर में नजरबंद कर दिया गया। पार्टी ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है।
भाजपा पर तानाशाही का आरोप-अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल को भी रोका गया था। अखिलेश ने सवाल उठाया कि सरकार विपक्ष की आवाज से इतना क्यों डर रही है? उनका कहना है कि भाजपा लोकतंत्र के बजाय ‘तानाशाही मॉडल’ पर चल रही है, जो जनता के अधिकारों के खिलाफ है।
पीडीए एकजुटता से भाजपा को चेतावनी-अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार को चेतावनी दी कि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) वर्ग अब एकजुट हो गया है और भाजपा की नाइंसाफी ज्यादा दिन नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा को समझना चाहिए कि दमन से लोकतंत्र को दबाया नहीं जा सकता। समाजवादी पार्टी जनता की आवाज उठाती रहेगी और सरकार के अन्याय के खिलाफ खड़ी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बरेली की जनता के साथ जो अन्याय हो रहा है, उसका जवाब भाजपा को आने वाले चुनावों में मिलेगा।
लोकतंत्र की रक्षा या सत्ता का दुरुपयोग?-अखिलेश यादव के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी ने भाजपा सरकार पर लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह स्पष्ट है कि बरेली की घटना ने विपक्ष को एक नया मुद्दा दे दिया है। अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति लोकतंत्र की रक्षा की दिशा में आगे बढ़ती है या सत्ता का दुरुपयोग जारी रहता है।



