रायपुर में ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में बड़ा घोटाला: पटवारी की मिलीभगत से जमीन के कागजों में हेराफेरी

रायपुर- रायपुर के भुइयां पोर्टल के जरिए जमीन के ऑनलाइन रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। पुलिस जांच में पता चला कि सरकारी और निजी जमीनों को अवैध तरीके से एक ही परिवार के नाम दर्ज किया गया। इस फर्जीवाड़े में एक पटवारी की मिलीभगत भी सामने आई है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है।
पांच गांवों में 70 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी- पुलिस के मुताबिक, पस्ता थाना क्षेत्र के कोटडीह, भेंडरी, परसवार खुर्द, कराडीह और पकराडीह गांवों में करीब 70 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ हुई है। जो जमीन पहले शासकीय और किसानों के नाम थी, उसे भुइयां पोर्टल के जरिए एक ही परिवार के सदस्यों के नाम कर दिया गया। यह सब पटवारी की आईडी से किया गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
अवैध धान खपाने के लिए रची गई साजिश- जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पटवारी के साथ मिलकर जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव किया ताकि भूमि समितियों में अवैध रूप से धान खपाया जा सके। अपने और अपने परिजनों के नाम ऑनलाइन रिकॉर्ड में जोड़कर उन्होंने मैन्युअल रिकॉर्ड के बिना ही जमीन का स्वामित्व बदल दिया। यह पूरी योजना डिजिटल सिस्टम का दुरुपयोग कर बनाई गई थी।
सरपंच की सतर्कता से खुला राज- यह मामला तब सामने आया जब एक गांव के सरपंच ने खरीदी केंद्र पर दस्तावेजों की जांच कराई। जांच में रिकॉर्ड में गड़बड़ी दिखी, जिसके बाद अन्य गांवों के सरपंचों को भी इसकी जानकारी दी गई। धीरे-धीरे यह मामला तहसील तक पहुंचा और शिकायत दर्ज कराई गई, जिससे जांच शुरू हुई।
तहसीलदार की जांच में पटवारी की भूमिका स्पष्ट- तहसीलदार की जांच में पता चला कि जमीन के मैन्युअल रिकॉर्ड में कोई संशोधन आदेश नहीं था, लेकिन ऑनलाइन पोर्टल में बदलाव कर दिया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि पटवारी की आईडी से वीरेंद्र गुप्ता और उसके परिवार के सदस्यों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में जोड़े गए थे, जो पूरी साजिश का केंद्र बिंदु था।
पटवारी निलंबित, अब गिरफ्तारी भी हुई- मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ने पहले ही पटवारी अजीत टोप्पो को निलंबित कर दिया था। पुलिस ने गहराई से जांच कर सबूत मिलने पर पटवारी और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अब इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जा रही है। रायपुर के इस ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड घोटाले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पटवारी की मिलीभगत से जमीन के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ ने आम लोगों का भरोसा डगमगा दिया है। अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस मामले की गहराई से जांच कर दोषियों को सख्त सजा दिलाए और सिस्टम को मजबूत बनाए।



