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Chhattisgarh

शराब घोटाले में बड़ा खुलासा: 29,800 पन्नों की चार्जशीट, अफसरों की नींद उड़ी, करोड़ों की संपत्ति सीज

रायपुर शराब घोटाला: ईडी की चार्जशीट में नया नाम, कार्रवाई की आहट तेज-छत्तीसगढ़ के रायपुर में सामने आए शराब घोटाले ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में एक बार फिर हलचल मचा दी है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करीब 29,800 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें आबकारी विभाग के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर आशीष श्रीवास्तव का नाम भी शामिल किया गया है। इससे पहले की जांच में उनका नाम नहीं था, लेकिन अब उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। इस लेख में हम इस घोटाले की जांच, आरोपियों की संपत्ति, और आगे की कार्रवाई के बारे में विस्तार से जानेंगे।

1. ईडी की चार्जशीट में नया नाम और जांच की गहराई-रायपुर के शराब घोटाले की जांच में ईडी ने अब तक 31 अधिकारियों को आरोपी बनाया है। चार्जशीट में आशीष श्रीवास्तव का नाम शामिल होना इस मामले में एक बड़ा मोड़ है क्योंकि पहले ईओडब्ल्यू की चार्जशीट में उनका जिक्र नहीं था। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि जांच और भी गहराई से हो रही है और नए तथ्य सामने आ रहे हैं। सचिव सह आयुक्त आर संगीता के अवकाश से लौटने के बाद इस मामले में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है। इस बीच, आरोपी अधिकारियों के बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं और कुल 38.21 करोड़ रुपये की संपत्ति को अटैच किया गया है। जांच में यह भी पता चला है कि कुछ अफसरों की पत्नियों के खातों में भी संदिग्ध लेनदेन हुआ है, जो जांच का हिस्सा बना है।

2. ईओडब्ल्यू और ईडी की जांच: गिरफ्तारी और सस्पेंस-शराब घोटाले की जांच में पहले ईओडब्ल्यू ने 29 अधिकारियों को आरोपी बनाया था, जिनमें से 22 को सस्पेंड कर दिया गया और बाकी 7 पहले ही रिटायर हो चुके थे। हाल ही में तत्कालीन आयुक्त निरंजन दास की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ कागजी घोटाला नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से की गई बड़ी बंदरबांट है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नए नाम और तथ्य सामने आ रहे हैं, जिससे अफसरों के बीच कड़ी कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई है। चार्जशीट में कई ऐसे सबूत हैं जिनसे बच पाना मुश्किल होगा।

3. 90 करोड़ की बंदरबांट: किसे कितना मिला?-जांच में सामने आए सबूतों के अनुसार, इस शराब घोटाले में करीब 90 करोड़ रुपये की बंदरबांट हुई है। सबसे ज्यादा रकम पूर्व आयुक्त निरंजन दास को मिली, जिन्हें 18 करोड़ रुपये की रिश्वत देने के प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा, इकबाल खान को 12 करोड़, नोहर सिंह ठाकुर को 11 करोड़, नवीन प्रताप सिंह तोमर को 6.7 करोड़, और राजेश जायसवाल को 5.79 करोड़ रुपये मिले। अन्य अफसरों को भी करोड़ों की रकम मिली है, जिसमें आशीष श्रीवास्तव को 54 लाख रुपये की रिश्वत देने के प्रमाण भी शामिल हैं। यह आंकड़े इस घोटाले की गंभीरता और पैमाने को दर्शाते हैं।

4. अचल-चल संपत्तियों पर ईडी की सख्त कार्रवाई-ईडी ने कई अफसरों की अचल और चल संपत्तियों को अटैच कर लिया है। जांच में करोड़ों की जमीन, मकान, नकदी और निवेश सामने आए हैं। निरंजन दास के नाम करीब 8.83 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई है। अन्य अफसरों जैसे नवीन प्रताप सिंह, गंभीर सिंह, मोहर सिंह ठाकुर, अरविंद पटले, प्रकाश पाल, अनंत कुमार सिंह आदि के नाम भी बड़ी संपत्तियां मिली हैं। यह साफ करता है कि मामला सिर्फ रिश्वत तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर संपत्ति खड़ी करने का भी है।

5. करोड़ों की एफडी और आय से अधिक संपत्ति का मामला-जांच में यह भी पता चला है कि कई अफसरों ने करोड़ों रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) कर रखी थी। अनंत सिंह के नाम 75.26 लाख रुपये, देवलाल वैद्य के नाम 1.10 करोड़ रुपये, और गंभीर सिंह नेताम के नाम 40 लाख रुपये की एफडी मिली है। इसके अलावा अन्य अफसरों के नाम भी लाखों की एफडी सामने आई हैं। अधिकांश अफसरों के पास उनकी आय से कहीं ज्यादा संपत्ति पाई गई है, जिससे उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का अलग मामला भी दर्ज किया जाएगा। अफसरों को यह बताना होगा कि इतनी संपत्ति उन्होंने किस स्रोत से बनाई, क्योंकि उनका मासिक वेतन औसतन 1 से 1.5 लाख रुपये ही था।

6. बहाली का रास्ता बंद, लंबी कानूनी लड़ाई की तैयारी-शराब घोटाले में सस्पेंड किए गए अफसरों को फिलहाल 50 प्रतिशत वेतन दिया जा रहा है। नियम के मुताबिक अगर 90 दिन में चार्जशीट दाखिल नहीं होती, तो वेतन 75 प्रतिशत हो जाता है। लेकिन अब ईडी ने अपनी अंतिम शिकायत दाखिल कर दी है, जिससे अफसरों की बहाली का रास्ता लगभग बंद हो गया है। उनकी बहाली केवल कोर्ट के फैसले के बाद ही संभव होगी। कुछ अफसर अगले एक-दो साल में रिटायर होने वाले हैं, जबकि जिनके खाते सीज किए गए हैं, उन्हें वेतन लेने के लिए भी कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। यह मामला अब लंबी कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ चुका है। रायपुर के इस शराब घोटाले की जांच में अब तक कई बड़े नाम सामने आए हैं और कार्रवाई तेज हो रही है। ईडी की चार्जशीट में नए नाम जुड़ने से यह मामला और भी गंभीर हो गया है। जांच एजेंसियां इस घोटाले को सिर्फ रिश्वतखोरी नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर संपत्ति हड़पने का मामला मान रही हैं। आने वाले समय में इस मामले में और भी खुलासे और कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है। यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा उदाहरण बन सकता है।

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