खड़गे का बड़ा हमला: ‘झूले की तरह झूल रही है भारत की विदेश नीति’, ट्रंप और चीन पर मोदी की चुप्पी पर उठे सवाल

कांग्रेस का केंद्र सरकार पर विदेश नीति को लेकर कड़ा हमला: खड़गे और जयराम ने उठाए गंभीर सवाल-कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे “जंगली पेंडुलम” की तरह अस्थिर बताया और प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए। साथ ही, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी चीन नीति पर सरकार के यू-टर्न को लेकर कड़ी आलोचना की है।
खड़गे का मोदी सरकार की विदेश नीति पर तीखा प्रहार-मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार की विदेश नीति इधर-उधर झूल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह देश को झुकने नहीं देने की बात करते हैं, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। यह नीति देश के हितों के खिलाफ जा रही है।
चीन पर प्रतिबंध हटाने को शहीदों का अपमान बताया-खड़गे ने सोशल मीडिया पर लिखा कि चीन पर लगे प्रतिबंध हटाए जा रहे हैं, जो गलवान में शहीद हुए जवानों के बलिदान का अपमान है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पहले चीन को क्लीन चिट दी और अब चीनी कंपनियों के लिए रास्ता साफ कर रही है, जो चिंता का विषय है।
ट्रंप के बयानों पर मोदी की चुप्पी पर सवाल-खड़गे ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत के रूस से तेल खरीदने पर बयान देते रहे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी चुप हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह ‘सर’ वाली विदेश नीति अब ‘सरेंडर’ जैसी लगने लगी है, जबकि विदेश नीति में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए।
नॉन-अलाइनमेंट नीति को नुकसान पहुंचाने का आरोप-खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने भारत की पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति को नुकसान पहुंचाया है। सरकार कभी इधर तो कभी उधर झुकती दिखती है, जिसकी कीमत देश की जनता भुगत रही है। विदेश नीति में स्थिरता और स्पष्टता की कमी साफ नजर आ रही है।
जयराम रमेश ने भी चीन नीति पर उठाए सवाल-कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि चीन पर से प्रतिबंध हटाना “सोचीसमझी आत्मसमर्पण नीति” का हिस्सा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से बजट सत्र में चीन नीति पर जवाब देने और संसद में खुली चर्चा कराने की मांग की है।
ऑपरेशन सिंदूर और चीन का सैन्य समर्थन-रमेश ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को सैन्य समर्थन दिया था और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने चीन को विरोधी बताया था। इसके बावजूद अब चीनी कंपनियों को सरकारी ठेकों की अनुमति देना देश की सुरक्षा पर सवाल उठाता है।
लद्दाख, अरुणाचल और ब्रह्मपुत्र का मसला-रमेश ने कहा कि लद्दाख में चीनी सेना की मौजूदगी, अरुणाचल में उकसावे और ब्रह्मपुत्र पर मेडोग डैम के बीच यह नीति झुकाव और भी चिंताजनक है। ऐसे समय में सरकार का रुख देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
बजट सत्र में सरकार से जवाब की मांग-कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री की चुप्पी बहुत लंबी हो चुकी है। अब जरूरी है कि संसद के बजट सत्र में चीन और विदेश नीति पर स्पष्ट जवाब दिया जाए। इतने बड़े रणनीतिक मुद्दों पर संसद को चर्चा का मौका न देना लोकतंत्र के खिलाफ है।



