
मजबूत आर्थिक विकास से हर नागरिक को मिलेगा फायदा: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बात-वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की आर्थिक विकास दर को लेकर अपनी स्पष्ट सोच साझा की है। उनका मानना है कि 7 से 8 फीसदी की विकास दर बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इस विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचता है, जिससे रोजगार के नए अवसर बनते हैं और जीवन स्तर सुधरता है।
दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य-निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान बनाए रखनी है। इसके लिए 7-8 फीसदी की विकास दर जरूरी है। सरकार की हर नीति इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई जाती है, ताकि देश की आर्थिक मजबूती बनी रहे।
आर्थिक विकास से रोजगार और उत्पादकता में वृद्धि-वित्त मंत्री ने बताया कि जब अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है, तो रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। इससे ज्यादा लोग कामकाजी क्षेत्र में जुड़ते हैं और उत्पादकता में सुधार होता है। यही वजह है कि सरकार विकास को केंद्र में रखकर योजनाएं बना रही है।
महिलाओं की वर्कफोर्स में बढ़ती भागीदारी-निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब नियोक्ता महिलाओं की कार्यकुशलता को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। सेमी-स्किल्ड नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। यह बदलाव कार्यस्थलों की तस्वीर को बेहतर बनाने में मदद करेगा और महिलाओं के लिए नए अवसर लाएगा।
बोर्डरूम में महिलाओं की कम मौजूदगी चिंता का विषय-हालांकि, बड़े पदों और बोर्डरूम में महिलाओं की संख्या अभी भी कम है। वित्त मंत्री ने कहा कि महिलाओं को नेतृत्व की भूमिकाओं में आना होगा ताकि वे फैसलों में भाग ले सकें और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकें। इस दिशा में और प्रयास जरूरी हैं।
ऑरेंज इकोनॉमी पर सरकार का खास ध्यान-निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार पिछले बजट से ऑरेंज इकोनॉमी जैसे एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स सेक्टर को समर्थन दे रही है। यह क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है।
बजट तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी-वित्त मंत्री ने बताया कि बजट की तैयारी अक्टूबर-नवंबर से शुरू होती है। इस दौरान उद्योग, व्यापारिक संगठन, अर्थशास्त्री, ट्रेड यूनियन और राज्यों से सुझाव लिए जाते हैं। सोशल मीडिया के जरिए आम लोगों की राय भी शामिल की जाती है, जिससे बजट व्यापक और संतुलित बनता है।
कई दौर की चर्चा के बाद बनता है अंतिम बजट-निर्मला सीतारमण ने कहा कि सुझावों को छांटकर मंत्रालयों और राज्यों के साथ चर्चा की जाती है। व्यवहारिकता और लागू करने की क्षमता को ध्यान में रखकर बदलाव किए जाते हैं। कई बार समीक्षा के बाद बजट भाषण को अंतिम रूप दिया जाता है, जिसमें संतुलन और जिम्मेदारी का खास ध्यान रखा जाता है।



