“झालमुड़ी बनाम दाल-बाटी चूरमा”: मध्यप्रदेश की सियासत में अब स्वाद की जंग!

मध्यप्रदेश की सियासत में स्वाद की जंग: झालमुड़ी बनाम दाल-बाटी चूरमा-मध्यप्रदेश की राजनीति में अब एक नया और दिलचस्प मुद्दा उभरकर सामने आया है। बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा “झालमुड़ी” ट्रेंड अब मध्यप्रदेश तक पहुंच गया है। इस नए स्वाद ने सियासी बहस को और भी गर्मा दिया है, जहां पारंपरिक दाल-बाटी चूरमा और झालमुड़ी के बीच मुकाबला चल रहा है।
पर्यटन स्थलों पर झालमुड़ी का स्वाद भी मिलेगा?-प्रदेश के पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोढ़ी ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों पर झालमुड़ी भी परोसी जा सकती है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां खाने-पीने की व्यवस्था है, वहां इसे शामिल करने पर विचार किया जाएगा। इस विषय पर अगली बैठक में अंतिम फैसला लिया जाएगा, जिससे पर्यटन को नया रंग मिलेगा।
कांग्रेस ने कहा: यह सिर्फ दिखावे की राजनीति है-कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि यह सब सिर्फ दिखावे के लिए किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मध्यप्रदेश की असली पहचान दाल-बाटी चूरमा है, जिसे हर आम आदमी पसंद करता है। सरकार को इस पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
“खाने का मजाक उड़ाना सही नहीं”-पीसी शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को ऐसे मुद्दों से हटकर गरीबों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सस्ता गैस सिलेंडर देना ज्यादा जरूरी है, बजाय खाने-पीने के मसलों पर राजनीति करने के। उनका साफ कहना है कि किसी भी खाने का मजाक उड़ाना ठीक नहीं है।
मोदी के झालमुड़ी खाने से बढ़ी चर्चा-पर्यटन मंत्री ने बताया कि झालमुड़ी अब पूरे देश में लोकप्रिय हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसे खा चुके हैं, जिससे इसकी चर्चा और बढ़ गई है। इसी वजह से इसे मध्यप्रदेश के पर्यटन केंद्रों पर शामिल करने का विचार उठाया गया है, ताकि यहां के स्वाद में नया रंग भरा जा सके।



