वॉशिंगटन में भारत-अमेरिका की अहम बैठक: व्यापार और रणनीतिक साझेदारी पर जोर

विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने वॉशिंगटन डीसी में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई ट्रेड डील का स्वागत किया और भारत-अमेरिका के सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की।
क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग को औपचारिक रूप देने की सहमति-बैठक में भारत-अमेरिका ने अहम खनिजों की खोज, खनन और प्रोसेसिंग में सहयोग को औपचारिक बनाने पर सहमति जताई। दोनों पक्ष मानते हैं कि भविष्य में इन मिनरल्स की मांग तेजी से बढ़ेगी। इससे आर्थिक अवसर बढ़ेंगे और सप्लाई चेन मजबूत होगी, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
ट्रेड डील को लेकर दोनों देशों की सकारात्मक प्रतिक्रिया-अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील का स्वागत किया। उन्होंने जोर दिया कि दोनों लोकतांत्रिक देश मिलकर नए आर्थिक अवसर पैदा कर सकते हैं और ऊर्जा सुरक्षा के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाएंगे।
रणनीतिक साझेदारी के कई पहलुओं पर हुई चर्चा-एस जयशंकर ने बताया कि बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और तकनीक जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न तंत्रों की जल्द बैठकें करने पर सहमति जताई है।
क्वाड के जरिए बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा-बैठक के अंत में दोनों नेताओं ने क्वाड के तहत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि एक समृद्ध और स्थिर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र भारत और अमेरिका के साझा हितों के लिए जरूरी है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया और जापान भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
रूबियो का बयान: आर्थिक अवसरों पर साथ काम करने की बात-मार्को रूबियो ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने जयशंकर के साथ क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग और नए आर्थिक अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने भारत-अमेरिका ट्रेड डील की सराहना की और कहा कि इससे दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा मिलेगी।
जयशंकर की अमेरिका यात्रा और अहम कार्यक्रम-एस जयशंकर 2 से 4 फरवरी तक अमेरिका दौरे पर हैं। इस दौरान वह क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल में हिस्सा लेंगे, जिसकी मेजबानी अमेरिका कर रहा है। इसके अलावा वह अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे, ताकि द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया जा सके।
ट्रंप-मोदी ट्रेड डील का असर: टैरिफ में कटौती-यह बैठक ऐसे समय हुई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि भारत पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया गया है। इसे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है, जो आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देगा।
क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल से क्या उम्मीदें हैं-अमेरिका में होने वाले पहले क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल में सप्लाई चेन को मजबूत और विविध बनाने पर जोर दिया जाएगा। यह बैठक तकनीकी नवाचार, आर्थिक मजबूती और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी खनिजों को सुरक्षित करने में सहयोग को नई गति देगी।
शीर्ष अमेरिकी नेताओं की मौजूदगी से बढ़ी गंभीरता-इस मिनिस्टीरियल बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ग्लोबल सप्लाई चेन के वरिष्ठ अधिकारी डेविड कोपली और आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग शामिल होंगे। इससे पता चलता है कि अमेरिका इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रहा है। वॉशिंगटन में हुई यह बैठक भारत-अमेरिका के बीच व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाली है। क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग और ट्रेड डील से दोनों देशों के आर्थिक और सुरक्षा हित मजबूत होंगे। क्वाड के माध्यम से बहुपक्षीय सहयोग भी और बढ़ेगा, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी है।



