Madhya Pradesh

बाल आश्रय गृह में 17 बच्चों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त: PIL दर्ज करने के आदेश, अधिकारियों से मांगा जवाब

इंदौर-उज्जैन बाल आश्रय गृह मामला: हाईकोर्ट ने लिया सख्त रुख, बच्चों की मौत पर संवेदनशील जांच का आदेश

हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने के दिए निर्देश- इंदौर और उज्जैन के बाल आश्रय गृहों में एक साल के भीतर 17 बच्चों की मौत ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। इस गंभीर मामले को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और इसे संवैधानिक महत्व का मुद्दा माना। कोर्ट ने कहा कि बच्चों की मौत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, इसलिए जनहित याचिका दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संबंधित अधिकारियों को दो सप्ताह में विस्तृत जवाब देने को कहा गया है। अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी, जिससे पता चलता है कि न्यायालय इस मामले को प्राथमिकता दे रहा है।

बच्चों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, संवैधानिक गंभीर मामला- जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने इस मामले को बच्चों के जीवन और सुरक्षा के अधिकार से जुड़ा बताया है। कोर्ट ने कहा कि हर बच्चे को जीवन का अधिकार है और आश्रय गृह में उनकी मौत बेहद चिंताजनक है। 17 मौतों को गंभीर लापरवाही माना गया है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, और इसमें कोई कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

युगपुरुष धाम से सेवाधाम आश्रम तक मौतों की चिंता बढ़ी- मामला इंदौर के युगपुरुष धाम से शुरू हुआ, जहां 10 दिव्यांग बच्चों की मौत के बाद 86 बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में भेजा गया। लेकिन वहां भी स्थिति नहीं सुधरी और 17 बच्चों की मौत हो गई। लगातार हो रही मौतों ने आश्रय गृहों की व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह साफ करता है कि बच्चों की देखभाल में कहीं न कहीं बड़ी कमी रही है।

मुख्य सचिव समेत कई अधिकारियों को नोटिस, दो सप्ताह में मांगा जवाब-हाईकोर्ट ने इस मामले में मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और सेवाधाम आश्रम प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। सभी से पूछा गया है कि बच्चों की मौत किन हालात में हुई और प्रशासन ने क्या कदम उठाए। कोर्ट जानना चाहता है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई थी। जवाब दो सप्ताह में मांगा गया है।

12 मार्च को अगली सुनवाई, संतोषजनक जवाब न मिलने पर सख्त कार्रवाई संभव- कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सेवाधाम आश्रम की निरीक्षण रिपोर्ट के बाद 12 मार्च को अगली सुनवाई होगी। यदि अधिकारियों के जवाब संतोषजनक नहीं मिले, तो कोर्ट सख्त निर्देश जारी कर सकता है। यह सुनवाई तय करेगी कि प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए कितनी जिम्मेदारी निभाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। यह मामला पूरे प्रदेश के लिए एक गंभीर चेतावनी बन चुका है।

यह मामला बच्चों की सुरक्षा और प्रशासन की जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। हाईकोर्ट की सख्ती से स्पष्ट है कि अब बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कोई समझौता नहीं होगा। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और कार्रवाई प्रदेश की संवेदनशीलता और न्याय व्यवस्था की परीक्षा होगी।

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