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Politics

तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़: वी. के. ससिकला ने बनाई नई पार्टी, जानिए पूरी कहानी

तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। दिवंगत नेता जे. जयललिता की करीबी सहयोगी वी. के. ससिकला ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है। दो हफ्ते पहले उन्होंने राजनीति में वापसी का संकेत दिया था और अब पार्टी का नाम, चुनाव चिन्ह समेत कई अहम बातें सामने आई हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इस नई पार्टी और ससिकला की रणनीति के बारे में।

नई पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह-वी. के. ससिकला ने शुक्रवार को घोषणा की कि उनकी नई पार्टी का नाम All India Puratchi Thalaivar Makkal Munnetra Kazhagam (AIPTMMK) होगा। पार्टी का चुनाव चिन्ह “नारियल का बाग” रखा गया है। ससिकला खुद इस पार्टी की अध्यक्ष बनेंगी। यह पार्टी पहले से ही 2016 में मदुरै के पी. सक्करवर्थी द्वारा पंजीकृत है, जिसे अब ससिकला सक्रिय कर रही हैं।

पार्टी के झंडे में तीन दिग्गज नेताओं की तस्वीरें-24 फरवरी को ससिकला ने अपनी पार्टी का झंडा भी जारी किया था। इसमें काला, सफेद और लाल रंग शामिल हैं। झंडे के बीच में तमिलनाडु के तीन महान नेताओं—सी. एन. अन्नादुरई, एम. जी. रामचंद्रन और जयललिता की तस्वीरें हैं। ससिकला का कहना है कि ये तीनों नेता तमिल राजनीति के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं, जिनसे वे प्रेरणा लेती हैं।

एमजीआर से तुलना करते हुए ससिकला का बयान-ससिकला ने कहा कि जिस तरह एम. जी. रामचंद्रन को 1972 में डीएमके से निकाला गया था और उन्होंने एआईएडीएमके को आगे बढ़ाया था, उनकी स्थिति भी कुछ वैसी ही है। वे एक ऐसे दल से जुड़ रही हैं जिसे एमजीआर और जयललिता के सच्चे समर्थकों ने शुरू किया था। इसलिए उनका मानना है कि वे भी उसी तरह राजनीति में अपनी जगह बनाएंगी।

गठबंधन के लिए खुला रखा विकल्प-ससिकला ने साफ कहा कि उनकी पार्टी अन्य राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि वे उन नेताओं की तरह नहीं हैं जो पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों को किनारे कर देते हैं और गठबंधन से इनकार कर देते हैं। यह बयान उन्होंने खासतौर पर एडप्पाडी के. पलानीस्वामी पर निशाना साधते हुए दिया।

रामदास के साथ गठबंधन की संभावना-राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ससिकला पट्टाली मक्कल काच्ची (PMK) के संस्थापक एस. रामदास के साथ गठबंधन कर सकती हैं। हालांकि अब इस पार्टी का नेतृत्व उनके बेटे अनबुमणि रामदास के हाथ में है। PMK खासतौर पर तमिलनाडु के वन्नियार समुदाय में मजबूत पकड़ रखती है, जो ससिकला के लिए फायदेमंद हो सकता है।

NDA में शामिल होने की कोशिशें नाकाम-सूत्रों के मुताबिक, ससिकला और रामदास दोनों ने नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) में शामिल होने की कोशिश की, लेकिन ससिकला के मामले में पलानीस्वामी और रामदास के मामले में अनबुमणि रामदास के कारण यह संभव नहीं हो पाया। अब दोनों नेता अपने-अपने प्रभाव वाले इलाकों में उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रहे हैं।

2027 तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगी ससिकला-आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी ठहराए जाने के कारण ससिकला 2027 तक चुनाव नहीं लड़ सकतीं। इसके बावजूद उनका मानना है कि उनकी पार्टी कुछ खास सीटों पर उम्मीदवार उतारकर, खासकर मुक्कुलथोर समुदाय वाले इलाकों में, चुनावी समीकरण बदल सकती है।

AIADMK से दूरी के बाद कमजोर हुआ समर्थन-ससिकला लंबे समय तक जयललिता की करीबी दोस्त और सलाहकार रही हैं और करीब तीन दशक तक उन्होंने AIADMK की राजनीति को परोक्ष रूप से प्रभावित किया। लेकिन 2021 में जेल से रिहा होने के बाद उन्हें पहले जैसा समर्थन नहीं मिला और पार्टी में वापसी की उनकी कोशिशें सफल नहीं हो सकीं।

तमिलनाडु की राजनीति में वी. के. ससिकला की नई पार्टी एक नया अध्याय खोलने जा रही है। जयललिता के बाद उनकी वापसी और नई राजनीतिक राह तमिल राजनीति में हलचल मचा सकती है। गठबंधन की संभावनाओं और चुनावी रणनीतियों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि ससिकला कितनी मजबूती से अपनी जगह बना पाती हैं।

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