महाराष्ट्र की बारामती सीट पर सुनेत्रा पवार का दबदबा: उपचुनाव में निर्विरोध जीत की संभावना

महाराष्ट्र की राजनीति में बारामती विधानसभा सीट फिर से सुर्खियों में है। वरिष्ठ नेता अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर आगामी उपचुनाव को लेकर बड़ी राजनीतिक हलचल मची हुई है। खबर है कि अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार इस सीट से चुनाव लड़ेंगी और उनकी बिना मुकाबले जीतने की संभावना भी जताई जा रही है। आइए इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
23 अप्रैल को बारामती और राहुरी में उपचुनाव-महाराष्ट्र में 23 अप्रैल को दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं। इनमें बारामती (पुणे) और राहुरी (अहिल्यानगर) सीट शामिल हैं। बारामती सीट वरिष्ठ नेता अजित पवार के निधन के कारण खाली हुई है, जबकि राहुरी सीट शिवाजी कर्दिले के निधन के बाद रिक्त हुई है। दोनों जगहों पर नेताओं के निधन के बाद उपचुनाव कराए जा रहे हैं।
अजित पवार का विमान हादसे में निधन-66 वर्षीय अजित पवार, जो एनसीपी के अध्यक्ष थे, 28 जनवरी को बारामती एयरपोर्ट पर उतरते समय उनके चार्टर्ड बिजनेस जेट के दुर्घटनाग्रस्त होने से निधन हो गए। वे बारामती से आठ बार विधायक रह चुके थे और छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद पर भी काम कर चुके थे। उनका जाना पार्टी और क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका था।
सुनेत्रा पवार बनीं उपमुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख-अजित पवार के निधन के तीन दिन बाद, 30 जनवरी को उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को एनसीपी विधायक दल का नेता चुना गया। इसके बाद उन्हें देवेंद्र फडणवीस की नेतृत्व वाली महा युति सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। 26 फरवरी को उन्हें एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी सर्वसम्मति से चुना गया, जिससे उनकी राजनीतिक जिम्मेदारी और बढ़ गई।
बारामती सीट पर अजित पवार का गहरा प्रभाव-बारामती सीट लंबे समय से अजित पवार का मजबूत गढ़ रही है। उन्होंने 1991 से लेकर 2024 तक आठ बार यहां से जीत हासिल की है। 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने भतीजे युगेंद्र पवार को भारी मतों से हराया था, जो उनकी पकड़ की मजबूती को दर्शाता है। इस क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता और प्रभाव बहुत गहरा है।
विपक्ष ने उम्मीदवार नहीं उतारने का संकेत दिया-विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाड़ी के हिस्से एनसीपी (शरद पवार गुट) ने पहले ही संकेत दे दिया है कि वे इस उपचुनाव में कोई उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। पार्टी के नेता रोहित पवार ने सभी दलों से अपील की है कि सुनेत्रा पवार को बारामती से निर्विरोध चुना जाए, क्योंकि यह क्षेत्र की भावना के अनुरूप होगा।
छह महीने के भीतर विधायक बनना जरूरी-सुनेत्रा पवार फिलहाल न तो विधायक हैं और न ही विधान परिषद की सदस्य। संविधान के अनुसार उपमुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें छह महीने के अंदर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य है। इसलिए बारामती उपचुनाव उनके लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
राज्यसभा सीट से इस्तीफा और चुनाव में उतरने की तैयारी-खबरों के मुताबिक, सुनेत्रा पवार इस चुनाव में भाग लेने से पहले अपनी राज्यसभा सीट से इस्तीफा देंगी। इसके बाद वे बारामती से विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। अगर विपक्ष उम्मीदवार नहीं उतारता है, तो उनकी निर्विरोध जीत लगभग तय मानी जा रही है।
बारामती सीट पर सुनेत्रा पवार की एंट्री महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय खोल रही है। अजित पवार के निधन के बाद पार्टी और क्षेत्र की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है। उपचुनाव में उनकी संभावित जीत से एनसीपी की पकड़ और मजबूत होगी। इस चुनाव पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं, जो आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
यह लेख महाराष्ट्र की बारामती सीट के उपचुनाव और सुनेत्रा पवार की भूमिका पर एक विस्तृत नजर डालता है, जिससे आपको इस राजनीतिक घटनाक्रम की पूरी समझ मिल सके।



