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Politics

वेस्ट एशिया संकट पर कांग्रेस का बड़ा सवाल: पाकिस्तान की मध्यस्थता से मोदी सरकार घिरी

वेस्ट एशिया तनाव पर कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला: पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठे सवाल-वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच कांग्रेस ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर कड़ी आलोचना की है। पार्टी ने सवाल उठाया है कि आखिर कैसे पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका में आ गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने सरकार की कूटनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

पाकिस्तान की नई भूमिका पर कांग्रेस की चिंता-कांग्रेस ने कहा है कि पाकिस्तान का मध्यस्थ के रूप में उभरना कई बड़े सवाल खड़े करता है। वह देश जिसे भारत अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा था, अब वैश्विक स्तर पर बातचीत का हिस्सा बन गया है। कांग्रेस इसे सरकार की कूटनीतिक कमजोरी मानती है और इस बदलाव को लेकर गंभीर सवाल पूछ रही है।

जयराम रमेश का मोदी सरकार पर सीधा हमला-कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पूरी दुनिया शांति की उम्मीद कर रही है, लेकिन भारत की ‘हग्लोमेसी’ पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने पूछा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भी पाकिस्तान कैसे इस भूमिका में आ गया, यह सरकार की बड़ी नाकामी है। उनका यह बयान सरकार की विदेश नीति पर बड़ा सवाल है।

मनमोहन सिंह सरकार से तुलना-कांग्रेस ने इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार का उदाहरण दिया। पार्टी का कहना है कि 2008 के मुंबई हमलों के बाद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर दिया गया था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदलती नजर आ रही है, जो चिंता का विषय है।

अमेरिका के साथ रिश्तों पर उठे सवाल-कांग्रेस ने यह भी सवाल किया कि अमेरिका के साथ करीबी रिश्तों के बावजूद भारत को कोई खास फायदा क्यों नहीं मिला। पार्टी का आरोप है कि भारत ने व्यापार समझौतों में ज्यादा रियायतें दीं, लेकिन इसके बदले कोई मजबूत कूटनीतिक लाभ हासिल नहीं कर पाया, जिससे विदेश नीति की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

BRICS+ में भारत की भूमिका पर सवाल-कांग्रेस ने पूछा कि जब भारत BRICS+ का अध्यक्ष है, तो उसने वेस्ट एशिया में शांति के लिए कोई पहल क्यों नहीं की। ईरान, UAE और सऊदी अरब जैसे देश इस मंच का हिस्सा हैं, ऐसे में भारत एक मजबूत मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिससे उसकी कूटनीतिक छवि कमजोर हुई है।

चीन और पाकिस्तान के बढ़ते रिश्तों पर चिंता-पार्टी ने चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि चीन लगातार पाकिस्तान का समर्थन कर रहा है, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद। इस स्थिति में भारत की रणनीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है और इसे लेकर गंभीर विचार-विमर्श की जरूरत है।

वेस्ट एशिया में जल्द शांति बहाल होने की उम्मीद-कांग्रेस ने कहा है कि वेस्ट एशिया में जल्द से जल्द शांति बहाल होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति को सामान्य करने की भी मांग की ताकि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। यह क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए जरूरी है।

इस तरह, कांग्रेस ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं और वेस्ट एशिया में भारत की भूमिका को लेकर चिंता जताई है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कूटनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

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