महिला आरक्षण पर सियासत तेज: कांग्रेस का आरोप—देरी कर रही सरकार, राहुल गांधी का पुराना पत्र फिर चर्चा में

महिला आरक्षण पर राजनीति गरमाई: कांग्रेस ने मोदी सरकार पर लगाया देरी का आरोप-देश में महिला आरक्षण को लेकर फिर से सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया है कि वे इस कानून को लागू करने में जानबूझकर देरी कर रहे हैं। पार्टी ने राहुल गांधी के 2018 के पत्र को भी सामने लाकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस का आरोप: महिला आरक्षण को टालने की कोशिश-कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने साफ कहा है कि सरकार महिला आरक्षण लागू करने में देरी कर रही है। उनका कहना है कि इसे परिसीमन जैसे मुद्दों से जोड़कर टाला जा रहा है। यह मामला पहले ही सुलझाया जा सकता था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
राहुल गांधी का 2018 का पत्र फिर चर्चा में-कांग्रेस ने राहुल गांधी का 16 जुलाई 2018 का पत्र सार्वजनिक किया है, जिसमें उन्होंने तत्काल महिला आरक्षण बिल लागू करने की मांग की थी। उन्होंने संसद के मानसून सत्र में इस बिल को पास कराने के लिए समर्थन मांगा था और इसे महिलाओं के अधिकार से जुड़ा अहम मुद्दा बताया था।
राज्यसभा से पास, लोकसभा में अटका बिल-राहुल गांधी ने अपने पत्र में याद दिलाया कि यह बिल 2010 में राज्यसभा से पास हो चुका है, लेकिन लोकसभा में अटका हुआ है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने पहले इसका समर्थन किया था, लेकिन बाद में उसकी प्राथमिकताएं बदल गईं, जिससे बिल आगे नहीं बढ़ पाया।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर उठाए सवाल-राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के बयानों का हवाला देते हुए पूछा था कि अगर सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए गंभीर है, तो इस बिल को बिना शर्त क्यों समर्थन नहीं देती। उन्होंने कहा कि यह मौका सरकार के इरादे दिखाने का सही समय है।
सियासत से ऊपर उठने की अपील-राहुल गांधी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर फैसला लें। उनका कहना था कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, जो अभी बहुत कम है। यह बदलाव का सही वक्त है।
नए संविधान संशोधन बिल पर भी विवाद-सरकार ने हाल ही में एक नया संविधान संशोधन बिल पेश किया था, जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था ताकि महिला आरक्षण लागू हो सके। लेकिन इसे लोकसभा में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला और बिल गिर गया।
वोटिंग में बिल को नहीं मिला जरूरी बहुमत-इस बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट किया, जबकि 230 सांसद इसके खिलाफ थे। लेकिन इसे पास करने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट नहीं मिले। इससे साफ है कि इस मुद्दे पर अभी भी व्यापक सहमति बनना बाकी है।
कांग्रेस की मांग: बिना देरी महिला आरक्षण लागू हो-कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि बिना किसी देरी के मौजूदा लोकसभा सीटों पर महिला आरक्षण लागू किया जाए। पार्टी का कहना है कि इसके लिए संसद के अगले सत्र में नया बिल लाया जाना चाहिए ताकि महिलाओं को जल्द से जल्द उनका हक मिल सके।



