MP में UCC लागू करने की तैयारी तेज: बनेगी 5 सदस्यीय कमेटी, एक साल में तैयार होगा ड्राफ्ट

मध्य प्रदेश में जल्द लागू होगी समान नागरिक संहिता: सरकार ने बनाई 5 सदस्यीय कमेटी बनाने की योजना-मध्य प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। इसके लिए एक खास 5 सदस्यीय कमेटी बनाई जाएगी, जो तय समय में ड्राफ्ट तैयार कर इसे लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। जानिए इस योजना के बारे में विस्तार से।
5 सदस्यीय कमेटी जल्द होगी गठित-सरकारी सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के आखिरी हफ्ते तक इस कमेटी का गठन हो सकता है। विधि विभाग ने प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। मुख्यमंत्री स्तर पर सदस्यों का चयन होगा ताकि प्रक्रिया में तेजी आए और स्पष्ट दिशा मिल सके।
विशेषज्ञों की टीम में होंगे विविध क्षेत्र के लोग-कमेटी के लिए 20-25 नामों पर चर्चा चल रही है, जिनमें सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद, समाजसेवी और वकील शामिल हैं। इनमें से पांच को चुना जाएगा जो इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संभालेंगे।
एक साल में तैयार होगा ड्राफ्ट-सरकार की योजना है कि कमेटी बनने के बाद एक साल के भीतर समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार कर लिया जाए। इसके बाद इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा और अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।
गुजरात और उत्तराखंड के मॉडल से मिलेगा मार्गदर्शन-मध्य प्रदेश सरकार उन राज्यों के अनुभव से सीखना चाहती है जहां पहले से UCC लागू है। गुजरात और उत्तराखंड के मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है और संभव है कि वहां की कमेटियों के प्रमुखों को भी सलाह के लिए बुलाया जाए।
2026 के अंत तक लागू करने का लक्ष्य-मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर इस प्रक्रिया को तेज किया गया है। सरकार चाहती है कि 2026 के अंत तक या उससे पहले समान नागरिक संहिता को लागू कर दिया जाए। इसके लिए सभी जरूरी कदम समय पर उठाए जा रहे हैं।
सभी वर्गों की राय को रखा जाएगा महत्व-कमेटी सिर्फ ड्राफ्ट तैयार नहीं करेगी, बल्कि विभिन्न वर्गों और हितधारकों से बातचीत भी करेगी। इसका मकसद है कि सभी की राय को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित और व्यावहारिक कानून बनाया जाए, जिससे किसी को असुविधा न हो।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों की चिंताएं भी हैं-जहां सरकार इसे ‘एक राष्ट्र, एक कानून’ की दिशा में बड़ा कदम मान रही है, वहीं विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने आदिवासी और दलित अधिकारों को लेकर चिंता जताई है। सरकार का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।
इस तरह मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और समावेशी तरीके से आगे बढ़ रही है, ताकि सभी वर्गों के हितों का सम्मान हो सके और एक मजबूत कानून बन सके।



