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बंगाल चुनाव में रिकॉर्ड मतदान: पहले चरण में 93% से ज्यादा वोटिंग ने तोड़े सारे आंकड़े

बंगाल चुनाव में रिकॉर्ड मतदान: पहले चरण में 93% से ज्यादा वोटिंग ने तोड़े सारे रिकॉर्ड-पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण ने इस बार इतिहास रच दिया है। 23 अप्रैल को हुए मतदान में 93.19 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जो अब तक का सबसे बड़ा मतदान प्रतिशत है। कुल 3.61 करोड़ मतदाताओं में से करीब 3.36 करोड़ ने वोट डाले, जो जनता की जागरूकता और उत्साह को दर्शाता है।

महिलाओं और पुरुषों की जबरदस्त भागीदारी-इस बार मतदान में महिलाओं और पुरुषों दोनों की भागीदारी बहुत मजबूत रही। करीब 1.65 करोड़ महिलाओं और 1.71 करोड़ पुरुषों ने वोट डाला। ग्रामीण और शहरी इलाकों में लंबी कतारें लगीं, जो दिखाता है कि लोगों में वोट की अहमियत को लेकर जागरूकता और जिम्मेदारी बढ़ी है।

सबसे ज्यादा वोटिंग वाले जिले-कूचबिहार में 96.2 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पूरे राज्य में सबसे अधिक है। इसके बाद दक्षिण दिनाजपुर में 95.44 प्रतिशत और मालदा में 94.79 प्रतिशत वोटिंग हुई। जलपाईगुड़ी, बीरभूम और उत्तर दिनाजपुर में भी 94 प्रतिशत से ज्यादा मतदान दर्ज हुआ। ये आंकड़े उत्तर बंगाल और ग्रामीण इलाकों में बढ़े उत्साह को दर्शाते हैं।

कुछ जिलों में मतदान प्रतिशत कम-दार्जिलिंग में 88.98 प्रतिशत और कालिम्पोंग में 83.04 प्रतिशत मतदान हुआ, जो राज्य के अन्य हिस्सों की तुलना में कम है। हालांकि, पहाड़ी और दूरदराज इलाकों में यह बढ़ोतरी सकारात्मक संकेत है, क्योंकि वहां आमतौर पर कम मतदान होता है।

पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा-इस बार का 93 प्रतिशत से ज्यादा मतदान 2011 के 84.72 प्रतिशत के रिकॉर्ड को तोड़ता है। 2011 में तृणमूल कांग्रेस ने 34 साल पुराने वाम शासन को खत्म किया था। अब बढ़ी हुई भागीदारी राज्य की राजनीति में जनता की गहरी दिलचस्पी और सक्रियता को दर्शाती है, जो चुनावी नतीजों पर असर डाल सकती है।

दूसरे चरण पर सबकी नजरें टिकीं-अब सबकी निगाहें 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण पर हैं, जिसमें सात जिलों की 142 सीटों पर मतदान होगा। पहले चरण की जबरदस्त भागीदारी के बाद उम्मीद है कि अगले चरण में भी लोग बढ़-चढ़कर वोट डालेंगे। मतदाता सूची में बड़े बदलाव के कारण यह चरण और भी दिलचस्प होगा।

यह लेख पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण के रिकॉर्ड मतदान को सरल और सहज भाषा में समझाता है, जिससे पाठकों को चुनावी प्रक्रिया और जनता की भागीदारी का बेहतर अंदाजा हो सके।

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