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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से शेयर बाजार में गिरावट, पश्चिम एशिया संकट बना बड़ा कारण

3 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ ईंधन, तेल और पेंट कंपनियों के शेयरों में दबाव-देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद शुक्रवार सुबह शेयर बाजार में इसका असर साफ दिखा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और पेंट बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट आई। करीब चार साल बाद हुई इस बढ़ोतरी के पीछे पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को मुख्य वजह माना जा रहा है।

ऑयल कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट-पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही सरकारी तेल कंपनियों के शेयर दबाव में आ गए। BSE पर BPCL के शेयर करीब 2.71 प्रतिशत टूट गए, जबकि HPCL के शेयर 2.39 प्रतिशत नीचे आए। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के शेयर भी 1.85 प्रतिशत तक गिर गए। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का दबाव कंपनियों पर बना हुआ है, जिससे शेयर बाजार में नकारात्मक असर पड़ा है।

पेंट कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ा असर-तेल कंपनियों के साथ-साथ पेंट बनाने वाली कंपनियों के शेयर भी गिरावट में रहे। पेंट इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल क्रूड ऑयल से जुड़ा होता है, इसलिए तेल की कीमतें बढ़ने से इन कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। इंडिगो पेंट्स के शेयर 1.36 प्रतिशत टूटे, एशियन पेंट्स और बर्जर पेंट्स के शेयर भी कमजोर नजर आए। निवेशकों को डर है कि बढ़ती लागत से मुनाफे पर असर पड़ेगा।

पश्चिम एशिया संकट ने बढ़ाई चिंता-विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई चेन में रुकावटों के कारण दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा गया है। खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास हालात बिगड़ने से तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद स्थिति और खराब हुई, जिससे तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई और कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं।

क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल-ब्रेंट क्रूड की कीमत शुक्रवार को 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। कुछ हफ्ते पहले यह 120 डॉलर तक पहुंच चुकी थी। फरवरी में यह कीमत 69 डॉलर थी, लेकिन पश्चिम एशिया संकट के बाद इसमें तेजी आई। हाल के दिनों में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन कीमतें अभी भी सामान्य स्तर से काफी ऊपर हैं।

सरकार पर बढ़ा दबाव, कंपनियों को भारी नुकसान-तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। एक तिमाही में यह नुकसान पूरे साल के मुनाफे के बराबर था। कुल नुकसान करीब 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, जिससे सरकार और कंपनियों को ईंधन की कीमतें बढ़ानी पड़ीं।

पहले एक्साइज ड्यूटी घटाकर दी गई थी राहत-सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों ने कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा दीं। अब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को संतुलित कदम माना जा रहा है, जिससे कंपनियों को राहत मिले और आम जनता पर ज्यादा बोझ न पड़े।

महंगाई बढ़ने की आशंका-विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ सकती है। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ेंगे। सरकार फिलहाल स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार और आम लोगों के लिए चुनौती बनी रहेंगी।

 

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