100 करोड़ के टेंडर पर उठा बवाल! स्वास्थ्य विभाग की निविदा में ‘मैच फिक्सिंग’ के आरोप

100 करोड़ के टेंडर में घमासान: स्वास्थ्य विभाग की निविदा में ‘मैच फिक्सिंग’ के आरोप, जांच की मांग तेज-रायपुर में स्वास्थ्य विभाग की करीब 100 करोड़ रुपये की मैनपावर सप्लाई निविदा विवादों में घिर गई है। स्थानीय एजेंसियों और व्यापारिक संगठनों ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि निविदा पहले से तय योजना के तहत तैयार की गई, जिससे खास कंपनी को फायदा पहुंचाया गया और छोटे ठेकेदारों को बाहर रखा गया। पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।
EMD की कम राशि पर उठे सवाल-इस टेंडर में सिर्फ 6 लाख रुपये की Earnest Money Deposit (EMD) तय की गई है, जो 100 करोड़ के टेंडर के लिए बेहद कम मानी जा रही है। स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि यह राशि सरकारी नियमों के अनुरूप नहीं है। व्यापारिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि EMD जानबूझकर कम रखी गई ताकि किसी खास कंपनी को फायदा हो, जिससे पूरे टेंडर की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
अलग-अलग सेवाओं को एक साथ जोड़ने पर नाराजगी-स्थानीय एजेंसियों ने इस बात पर भी आपत्ति जताई है कि सुरक्षा गार्ड, सफाई कर्मचारी, कंप्यूटर ऑपरेटर, ड्राइवर, फिटर और तकनीकी स्टाफ जैसी कई सेवाओं को एक ही टेंडर में शामिल किया गया है। पहले ये सेवाएं अलग-अलग टेंडर में होती थीं, जिससे छोटे ठेकेदार भी हिस्सा ले पाते थे। अब सभी सेवाओं को जोड़ने से छोटे सेवा प्रदाताओं के लिए पात्रता पाना मुश्किल हो गया है।
पात्रता शर्तों को अव्यवहारिक बताया गया-टेंडर में न्यूनतम 300 मैनपावर का अनुभव, 10 करोड़ रुपये का एकल वर्क ऑर्डर और 100 करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर जैसी शर्तें रखी गई हैं। स्थानीय एजेंसियों का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग में कभी 300 कर्मचारियों वाला एकल कार्यादेश नहीं दिया गया। इसलिए ये शर्तें केवल बड़ी बाहरी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश लगती हैं।
GeM पोर्टल पर टेंडर न डालने का आरोप-सेवा प्रदाताओं ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार के 2017 के निर्देशों के बावजूद इस निविदा को Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल पर प्रकाशित नहीं किया गया। साथ ही टेंडर का प्रचार-प्रसार भी पर्याप्त नहीं हुआ। कई एजेंसियों को समय पर जानकारी नहीं मिली, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं।
उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज-व्यापारिक संगठनों और स्थानीय एजेंसियों ने EMD निर्धारण, पात्रता शर्तों, GeM पोर्टल का उपयोग न करने और निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते जांच नहीं हुई तो भविष्य में छोटे सेवा प्रदाताओं के लिए सरकारी टेंडरों में भाग लेना और मुश्किल हो जाएगा।
चिकित्सा शिक्षा विभाग का बयान-चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉ. यूएस पैकरा ने कहा कि विभाग को कई शिकायतें मिली हैं। उन्होंने बताया कि टेंडर प्रक्रिया GeM पोर्टल पर शुरू हुई थी, लेकिन फिलहाल टेंडर हटा दिया गया है। विभाग शिकायतों की जांच कर रहा है और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा। स्थिति की समीक्षा के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।


