होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का बड़ा दांव! क्या फिर महंगा होगा पेट्रोल-डीजल और गैस?

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का बड़ा दांव: क्या फिर महंगा होगा पेट्रोल-डीजल और गैस?-मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। ईरान और ओमान इस समुद्री मार्ग पर स्थायी टोल सिस्टम लागू करने पर चर्चा कर रहे हैं। अगर यह लागू हुआ तो इसका असर सीधे वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर पड़ेगा। इससे पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
ईरान और ओमान की क्या योजना है?-ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की योजना बना रहे हैं। ईरान का कहना है कि इस इलाके की सुरक्षा और ट्रैफिक कंट्रोल पर भारी खर्च आता है, जिसे जहाज कंपनियों को देना चाहिए। फ्रांस में ईरान के राजदूत ने भी कहा कि जो देश इस मार्ग का फायदा उठाते हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। हालांकि, ओमान की तरफ से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम?-होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल और एलएनजी इसी रास्ते से एशिया और यूरोप पहुंचता है। यहां किसी भी तरह की रुकावट या नया शुल्क वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित करता है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और आम लोगों की जेब पर असर पड़ता है।
अमेरिका-इजरायल के साथ तनाव के बाद बदला माहौल-अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी है। फरवरी में हुए हमलों के बाद उसने कुछ जहाजों की आवाजाही रोक दी थी। ईरान इसे अस्थायी कदम नहीं बल्कि लंबी रणनीति मान रहा है। वहीं अमेरिका और खाड़ी देश इस कदम का विरोध कर रहे हैं।
क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम?-अगर होर्मुज स्ट्रेट पर टोल सिस्टम लागू हो गया तो जहाज कंपनियों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा, जिससे ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ेगा। यह बढ़ी हुई लागत तेल की कीमतों में जुड़ जाएगी और आम लोगों तक महंगाई के रूप में पहुंचेगी। खासकर भारत जैसे देश, जो तेल का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, वहां इस दबाव का असर साफ दिखेगा।
ईरान का सख्त रुख और वैश्विक चिंता-ईरान ने साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका रुख नहीं बदलेगा। संसद में भी इससे जुड़ा प्रस्ताव पास हो चुका है। ईरान इस इलाके की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता मानता है। दूसरी तरफ पश्चिमी देश और खाड़ी के कई राष्ट्र इसे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई के लिए खतरा मान रहे हैं। अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो मिडिल ईस्ट का तनाव और बढ़ सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।


