महंगे स्मार्टफोन से लोग परेशान, अब सेकेंड हैंड मोबाइल की बढ़ी डिमांड

महंगे स्मार्टफोन ने बढ़ाई लोगों की टेंशन, सेकेंड हैंड मोबाइल की ओर बढ़ा रुझान-भारत में स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों ने लाखों ग्राहकों की खरीदारी की योजना को प्रभावित कर दिया है। एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आधे से ज्यादा लोग नया फोन खरीदने से बचेंगे और पुराने या सेकेंड हैंड मोबाइल की तरफ रुख करेंगे। जुलाई से दिसंबर के बीच स्मार्टफोन खरीदने वाले करीब 54 प्रतिशत लोग कीमतों के कारण अपना फैसला बदल सकते हैं। इससे मोबाइल कंपनियों की बिक्री पर बड़ा असर पड़ सकता है और सालाना सेल में भारी गिरावट आ सकती है।
नए फोन की जगह सेकेंड हैंड मोबाइल की ओर बढ़ता रुझान-रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों ने इस साल के अंत तक नया स्मार्टफोन खरीदने का मन बनाया था, उनमें से करीब 48 प्रतिशत लोग फिलहाल खरीदारी टालने का सोच रहे हैं। उनका मानना है कि अगर कीमतें कम हुईं तो बाद में खरीदना बेहतर होगा। वहीं करीब 6 प्रतिशत लोग नए फोन की बजाय रीफर्बिश्ड या सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदने की तैयारी में हैं। इसका फायदा सेकेंड हैंड मोबाइल मार्केट को मिलेगा और इस साल रीफर्बिश्ड फोन की बिक्री में तेज़ी आ सकती है।
स्मार्टफोन महंगे होने की वजहें-जनवरी 2025 से मई 2026 के बीच स्मार्टफोन की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसका मुख्य कारण मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतें हैं। स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली NAND Flash और DRAM चिप्स की ग्लोबल कीमतों में लगातार इजाफा हुआ है, जो फोन की स्टोरेज और परफॉर्मेंस के लिए जरूरी हैं। इनकी कीमत बढ़ने से कंपनियों ने फोन की कीमतें भी बढ़ा दी हैं। खासकर 20 हजार रुपये से कम कीमत वाले बजट स्मार्टफोन की कीमतों में 8 से 12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
AI कंपनियों की बढ़ती मांग भी वजह-Techarc के फाउंडर फैसल कवूसा के मुताबिक, स्मार्टफोन महंगे होने के पीछे तीन बड़ी वजहें हैं। पहली, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों की बढ़ती मांग, जिससे मेमोरी चिप्स की कीमतें बढ़ीं। दूसरी, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी, जिससे आयात महंगा हुआ। तीसरी वजह मोबाइल कंपनियों की नई रणनीति है, जो ज्यादा मुनाफे वाले महंगे फोन बेचने पर ध्यान दे रही हैं। इससे आम ग्राहक पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
मोबाइल कंपनियों के लिए खतरे की घंटी-Trakin Tech के फाउंडर अरुण प्रभुदेसाई का कहना है कि ग्राहक अच्छे फीचर्स चाहते हैं, लेकिन हर कीमत पर नहीं। अगर कीमतें बढ़ती रहीं तो लोग इंतजार करेंगे, कम फीचर्स वाला फोन खरीदेंगे या सेकेंड हैंड डिवाइस की ओर जाएंगे। EMI का सहारा भी बढ़ेगा। यह मोबाइल कंपनियों के लिए संकेत है कि अब सिर्फ बड़े स्पेसिफिकेशन से काम नहीं चलेगा। जो ब्रांड किफायती कीमत में बेहतर टेक्नोलॉजी देंगे, वही आगे बढ़ेंगे।
EMI और फाइनेंस की मुश्किलें भी बढ़ीं-स्मार्टफोन खरीदना महंगा होने के साथ-साथ EMI और फाइनेंस भी अब आसान नहीं रहे। बैंकों और फाइनेंस कंपनियों ने लोन देने के नियम सख्त कर दिए हैं। खासकर छोटे शहरों और कम आय वाले ग्राहकों को फोन फाइनेंस कराने में दिक्कत हो रही है। कई के पास सही क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती या वे ऐसे सेक्टर में काम करते हैं जहां इनकम का रिकॉर्ड साफ नहीं होता। एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोकल मोबाइल दुकानदारों को फाइनेंस सिस्टम से जोड़कर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है।
आने वाले महीनों में स्मार्टफोन बाजार का हाल-अगर कंपनियां जल्द कीमतों को कंट्रोल नहीं करतीं तो इस साल स्मार्टफोन बाजार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सालाना स्मार्टफोन बिक्री 136-138 मिलियन यूनिट्स से घटकर 115-120 मिलियन तक आ सकती है। इसका मतलब है कि लाखों लोग नया फोन खरीदने से पीछे हटेंगे। फिलहाल ग्राहक अच्छे फीचर्स और बजट के बीच संतुलन तलाश रहे हैं। भविष्य में वही कंपनियां सफल होंगी जो ग्राहकों की जेब के हिसाब से स्मार्टफोन लॉन्च करेंगी।



