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Chhattisgarh

बस्तर में केमिकल वाले फल-सब्जियों की बिक्री, खाद्य सुरक्षा पर उठे सवाल

बस्तर में फलों और सब्जियों की सुरक्षा पर सवाल, बिना जांच के बिक रहे केमिकल वाले उत्पाद-बस्तर में बाजार में बिक रहे फलों और सब्जियों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता बढ़ रही है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन भले ही सड़े-गले फलों को नष्ट करने का दावा करता रहे, लेकिन असली खतरा उन फलों और सब्जियों से है जिनमें खतरनाक केमिकल इस्तेमाल हो सकते हैं। आम लोग रोजाना बाजार से फल खरीदकर अपने परिवार को खिलाते हैं, लेकिन यह तय करना मुश्किल है कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं या नहीं। इस वजह से बस्तर में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

बस्तर में नहीं है फलों और सब्जियों की जांच के लिए आधुनिक लैब-सबसे बड़ी समस्या यह है कि बस्तर संभाग में अभी तक कोई आधुनिक फूड टेस्टिंग लैब नहीं है, जहां फलों और सब्जियों की तुरंत वैज्ञानिक जांच हो सके। विभागीय अधिकारियों ने खुद माना है कि स्थानीय स्तर पर केमिकल टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसका मतलब यह है कि बाजार में बिक रहे फलों में कैल्शियम कार्बाइड, ऑक्सीटोसिन, एथिलीन या अन्य खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल हुआ है या नहीं, इसकी तुरंत पुष्टि नहीं हो सकती। ऐसे में लोग बिना सही जानकारी के इन फलों का सेवन कर रहे हैं, जो उनकी सेहत के लिए खतरा हो सकता है।

आंखों से देखकर कैसे तय होगा फल सुरक्षित है या नहीं-अधिकारियों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान फल और सब्जियों को देखकर अंदाजा लगाया जाता है कि वे किस तरह से पकाए गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि केवल देखने से कैसे पता चलेगा कि फल प्राकृतिक तरीके से पके हैं या उनमें जहरीले केमिकल मिलाए गए हैं। कई बार केमिकल से पकाए गए फल बाहर से चमकदार और ताजे लगते हैं, लेकिन अंदर से खराब हो सकते हैं। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि केवल आंखों से जांच करना पर्याप्त नहीं है, इसके लिए वैज्ञानिक जांच और लैब रिपोर्ट जरूरी है ताकि लोगों की सेहत सुरक्षित रहे।

संदिग्ध सैंपल रायपुर भेजने पर टिकी पूरी व्यवस्था-बस्तर में जब भी किसी फल या सब्जी पर शक होता है, तो विभाग उसके सैंपल लेकर रायपुर स्थित फूड टेस्टिंग लैब भेजता है। वहां जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होती है। लेकिन इस प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है। तब तक वही फल और सब्जियां बाजार में बिककर लोगों तक पहुंच चुकी होती हैं। इसलिए स्थानीय लैब की कमी बड़ी समस्या बन चुकी है। अगर बस्तर में ही जांच की सुविधा होती तो संदिग्ध फलों की तुरंत जांच कर कार्रवाई की जा सकती थी।

वैज्ञानिक जांच के बिना अधूरी मानी जा रही खाद्य सुरक्षा-आम तौर पर ऐसे मामलों की जांच स्टेट फूड टेस्टिंग लैब, NABL मान्यता प्राप्त लैब या FSSAI अप्रूव्ड लैब में की जाती है। इन लैब में केमिकल एनालिसिस के जरिए पता लगाया जाता है कि फलों और सब्जियों में प्रतिबंधित पदार्थों का इस्तेमाल हुआ है या नहीं। फिलहाल बस्तर में विभाग ने 62 किलो सड़े-गले फल नष्ट करने की बात कही है, लेकिन केमिकल से पकाए गए फलों को लेकर कोई स्थानीय लैब रिपोर्ट नहीं आई है। इससे साफ है कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था अभी भी अनुमान और बाहरी जांच पर निर्भर है।

लोगों की सेहत को लेकर बढ़ रही चिंता-बाजार में बिक रहे फल और सब्जियां सीधे लोगों की सेहत से जुड़ी हैं। अगर इनमें जहरीले रसायनों का इस्तेमाल हो रहा है तो इसका असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर सबसे ज्यादा पड़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक केमिकल वाले फलों का सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए लोग मांग कर रहे हैं कि बस्तर में जल्द से जल्द अत्याधुनिक फूड टेस्टिंग लैब शुरू की जाए ताकि फलों और सब्जियों की सही समय पर जांच हो सके। सिर्फ दिखावे की कार्रवाई नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रमाण के आधार पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

 

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