ट्रंप का दावा- ईरान से शांति समझौता लगभग तय, तेहरान ने किया खंडन, बढ़ा नया विवाद

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर एक बड़ा समझौता लगभग तय हो चुका है। उन्होंने बताया कि इस पर जल्द ही यूरोप में हस्ताक्षर हो सकते हैं। लेकिन ट्रंप के इस दावे के कुछ ही समय बाद ईरान ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है। इस बयानबाजी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल मचा दी है।
ट्रंप ने कहा- समझौता होने के बेहद करीब-व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि समझौते के ज्यादातर बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है और जल्द इसकी घोषणा हो सकती है। ट्रंप ने बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस संभावित हस्ताक्षर समारोह में शामिल हो सकते हैं, जो यूरोप में होगा।
ईरान ने दावों को बताया पूरी तरह गलत-ट्रंप के बयान के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के दावे वास्तविकता से मेल नहीं खाते। ईरानी अधिकारियों ने साफ किया कि देश के शीर्ष नेतृत्व ने अभी तक किसी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। तेहरान ने कहा कि अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ और अमेरिका के दावे समय से पहले हैं।
ईरान ने रखीं अपनी प्रमुख शर्तें-ईरान ने कहा कि किसी भी समझौते के लिए उसकी कुछ शर्तें हैं, जैसे संवर्धित यूरेनियम न छोड़ना, परमाणु कार्यक्रम पर अतिरिक्त रियायतें न देना और देश के रणनीतिक हितों की सुरक्षा। साथ ही आर्थिक हितों और विदेशों में फंसी संपत्तियों के मुद्दे भी अहम हैं। बिना इन मुद्दों के समाधान के कोई समझौता संभव नहीं।
होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर मतभेद-ट्रंप ने कहा था कि समझौते के बाद होरमुज जलडमरूमध्य सामान्य हो सकता है, लेकिन ईरान ने इसे खारिज किया। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि इस समुद्री मार्ग की स्थिति उनके राष्ट्रीय हितों से जुड़ी है और कोई फैसला उसी के अनुसार होगा।
ट्रंप बोले- ईरान अब समझौता चाहता है-ट्रंप ने दावा किया कि हाल की घटनाओं और दबाव के बाद ईरान समझौते के लिए गंभीर हो गया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच एक मजबूत और विस्तृत समझौता तैयार हो रहा है, जिसका मकसद है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार न बनाए।
कुछ घंटे पहले दी थी सख्त चेतावनी-दिलचस्प बात यह है कि समझौते की बात से कुछ घंटे पहले ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी और कहा था कि जरूरत पड़ी तो कठोर कदम उठाएंगे। बाद में उन्होंने कहा कि शांति वार्ता में प्रगति के कारण सैन्य कार्रवाई को टाल दिया गया।
मध्य पूर्व के कई देशों से हुई बातचीत-ट्रंप ने बताया कि उन्होंने कतर, यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत की है। इन चर्चाओं का मकसद क्षेत्रीय स्थिरता और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ये देश अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अभी भी बना हुआ है अनिश्चितता का माहौल-ट्रंप के सकारात्मक संकेतों के बावजूद ईरान के खंडन के बाद स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। पिछले हफ्तों में कई बार समझौते की खबरें आईं, लेकिन कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई। दुनिया की नजरें अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी हैं, क्योंकि इससे मध्य पूर्व और वैश्विक राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।



