
वेनेजुएला में 39 सेकंड के भीतर दो भूकंप, 920 मौतें, लाखों बेघर… तबाही का सबसे भयानक मंजर-वेनेजुएला इस वक्त अपनी सबसे भयानक प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। बुधवार देर रात महज 39 सेकंड के अंदर 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंप आए, जिन्होंने पूरे देश को हिला कर रख दिया। खासतौर पर उत्तरी तटीय इलाकों में भारी तबाही हुई है। हजारों इमारतें टूट गईं, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और कई इलाके मलबे में तब्दील हो गए। अब तक 920 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों घायल हैं। लाखों लोग बेघर हो गए हैं और सुरक्षित जगहों पर शरण लेने को मजबूर हैं। राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, लेकिन लगातार झटकों के कारण काम में काफी मुश्किलें आ रही हैं।
सरकार ने कहा- हालात जितने गंभीर हैं, उतनी ही सच्चाई जनता के सामने रखेंगे-वेनेजुएला की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिग्ज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मृतकों की संख्या बढ़कर 920 हो गई है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार इस त्रासदी की पूरी सच्चाई जनता के सामने रखेगी। प्रशासन का पूरा ध्यान ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाने और प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाने पर है। सेना, स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। अस्पतालों में अतिरिक्त मेडिकल स्टाफ तैनात किया गया है और अस्थायी राहत शिविर बनाए जा रहे हैं। हालांकि कई दूरदराज इलाकों तक पहुंचना अभी भी मुश्किल है। प्रशासन का कहना है कि हालात लगातार बदल रहे हैं, इसलिए मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ सकती है।
मलबे में जिंदगी की तलाश, हर गुजरता घंटा बचाव अभियान को बना रहा मुश्किल-भूकंप के बाद के शुरुआती 48 से 72 घंटे सबसे अहम होते हैं क्योंकि इसी दौरान मलबे में दबे लोगों के जीवित मिलने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, उम्मीदें कम होती जा रही हैं। कई इलाकों में भारी मशीनें नहीं पहुंच पा रही हैं, इसलिए स्थानीय लोग अपने हाथों से मलबा हटाकर अपने परिवार और पड़ोसियों की तलाश कर रहे हैं। बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन गिरी हुई इमारतें और टूटे रास्ते राहत कार्य में बड़ी बाधा हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि हर मिनट कीमती है और जितनी जल्दी लोगों तक पहुंचा जाएगा, उतनी ज्यादा जानें बचेंगी। कठिन हालात के बावजूद राहतकर्मी बिना रुके काम कर रहे हैं।
राहत में देरी पर लोगों का गुस्सा, रेड क्रॉस ने भी जताई चिंता-प्रभावित इलाकों से कई लोगों ने आरोप लगाया कि शुरुआती घंटों में सरकारी मदद समय पर नहीं पहुंची। कई परिवारों को अपने प्रियजनों को बचाने के लिए बिना आधुनिक उपकरण के खुद ही मलबा हटाना पड़ा। लोगों का मानना है कि अगर राहत दल जल्दी पहुंचते तो कई जानें बच सकती थीं। रेड क्रॉस ने भी चेतावनी दी है कि समय बीतने के साथ मलबे में दबे लोगों को निकालना मुश्किल होता जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मलबे में फंसे लोगों को पानी या हवा मिल रही हो तो उनकी बचने की संभावना बनी रहती है। इसी उम्मीद के साथ राहत अभियान जारी है और हर संभावित जगह पर खोजबीन हो रही है।
दर्द के बीच कुछ चमत्कार भी आए सामने, मलबे से जिंदा निकले लोग-इस भीषण त्रासदी के बीच कुछ ऐसी घटनाएं भी आईं जिन्होंने लोगों को उम्मीद दी है। ओमार रेयेस ने बताया कि उनके करीब 20 परिवार के सदस्य मारे गए हैं, लेकिन उनके दो छोटे बच्चे अभी भी मलबे में दबे हैं। उनका परिवार बच्चों के सुरक्षित मिलने की दुआ कर रहा है। राजधानी कराकस से खबर आई कि कई घंटे बाद एक युवक को जिंदा निकाला गया। ला गुएरा में ढही 10 मंजिला इमारत से एक बच्ची को बचाया गया। सोशल मीडिया पर एक पालतू कुत्ते को मलबे से निकालने का वीडियो वायरल हो रहा है। ये घटनाएं दिखाती हैं कि मुश्किल हालात में भी चमत्कार संभव हैं।
दुनिया ने बढ़ाया मदद का हाथ, लाखों लोगों तक राहत पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती-वेनेजुएला की इस भयंकर आपदा के बाद कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मदद का हाथ बढ़ाया है। संयुक्त राष्ट्र ने 25 अंतरराष्ट्रीय आपदा टीमों के साथ करीब 1000 राहतकर्मियों को प्रभावित इलाकों में भेजा है। अमेरिका ने 15 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है और उसकी नौसेना के दो बड़े जहाज राहत सामग्री लेकर रवाना हो चुके हैं। राहत कार्य को आसान बनाने के लिए कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी गई है। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन के अनुसार 67.6 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें 20 लाख सिर्फ कराकस के हैं। लगातार आफ्टरशॉक्स के कारण लोग घर लौटने से डर रहे हैं और पार्क, स्कूल, मैदान राहत शिविर बन गए हैं। अब सरकार की सबसे बड़ी चुनौती हर प्रभावित तक राहत पहुंचाना और लाखों बेघर लोगों का पुनर्वास करना है।



