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अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई, 2 करोड़ लोगों के पहुंचने का दावा, भारत समेत कई देशों की मौजूदगी

खामेनेई के अंतिम संस्कार की शुरुआत-ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। उनके पार्थिव शरीर को सबसे पहले उस जगह ले जाया गया जहां उन्होंने अंतिम सांस ली थी। यह कार्यक्रम पहले तय नहीं था, लेकिन बाद में इसे श्रद्धांजलि के खास हिस्से के रूप में शामिल किया गया। 4 और 5 जुलाई को होने वाले सार्वजनिक विदाई समारोह में करोड़ों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। साथ ही कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी शोक जताया है।

अंतिम सांस वाली जगह पर दी गई खास श्रद्धांजलि-ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, खामेनेई के पार्थिव शरीर को उनके निधन स्थल पर ले जाया गया। अधिकारियों ने बताया कि यह फैसला पहले कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था, लेकिन बाद में इसे अंतिम श्रद्धांजलि के रूप में जोड़ा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और माहौल काफी भावुक था। ईरानी मीडिया ने इसे दिवंगत नेता को दिया गया विशेष सम्मान बताया। इसके बाद अंतिम संस्कार की अन्य धार्मिक और सार्वजनिक रस्में भी शुरू हो गईं।

विदाई समारोह में 2 करोड़ लोगों के पहुंचने का दावा-ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि 4 और 5 जुलाई को होने वाले सार्वजनिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। राजधानी तेहरान समेत देश के कई हिस्सों से लोग समारोह स्थल की ओर बढ़ रहे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। यह ईरान के इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक अंतिम संस्कारों में से एक माना जा रहा है, जिसमें कई विदेशी प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होंगे।

संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने जताई संवेदना-अंतिम संस्कार से पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बात कर शोक व्यक्त किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, लेबनान में संघर्ष-विराम और कूटनीतिक प्रयासों पर भी चर्चा की। इसके अलावा कई देशों के नेताओं ने भी ईरान के प्रति संवेदना जताई है। ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय सम्मान और समर्थन का बड़ा संकेत माना है।

घाना ने पुरानी मुलाकात को याद किया-घाना में ईरान के दूतावास ने अयातुल्ला खामेनेई को श्रद्धांजलि देते हुए 2016 की एक अहम मुलाकात का जिक्र किया। उस समय घाना के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा ने खामेनेई से मुलाकात की थी। दूतावास ने बताया कि उस बैठक में व्यापार या तेल के बजाय अफ्रीका की चुनौतियों और वैश्विक हालात पर चर्चा हुई थी। पोस्ट में कहा गया कि खामेनेई आत्मनिर्भरता, सहयोग और स्वतंत्र देशों के बीच मजबूत रिश्तों के पक्षधर थे। उनके विचारों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

भारत भी भेजेगा उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल-भारत सरकार ने भी खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने का फैसला किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। दोनों नेता 3 जुलाई को ईरान पहुंचेंगे और अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह दौरा भारत और ईरान के पारंपरिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मामलों में कूटनीतिक प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर होगा।

 

 

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