दिल्ली की हवा बदलने का बड़ा मिशन: 7 साल में 8,300 करोड़ का ‘स्वच्छ वायु, स्वस्थ दिल्ली’ प्लान

दिल्ली के लिए सात साल का स्वच्छ वायु मिशन-दिल्ली सरकार ने राजधानी की हवा को साफ करने के लिए 8,300 करोड़ रुपये की लागत से सात साल तक चलने वाला ‘स्वच्छ वायु, स्वस्थ दिल्ली’ मिशन शुरू करने का ऐलान किया है। यह योजना सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक चलेगी। इसका मकसद सिर्फ सर्दियों में नहीं बल्कि पूरे साल प्रदूषण कम करना है। इस योजना में कई विभाग और एजेंसियां मिलकर काम करेंगी ताकि प्रदूषण के हर स्रोत पर प्रभावी नियंत्रण हो सके और दिल्लीवासियों को साफ हवा मिल सके।
पूरे साल प्रदूषण नियंत्रण पर फोकस-दिल्ली में सर्दियों में प्रदूषण सबसे ज्यादा बढ़ता है, लेकिन इस योजना में पूरे साल प्रदूषण के स्रोतों पर काम किया जाएगा। इसमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क की धूल, निर्माण कार्यों का मलबा, कचरा जलाना, औद्योगिक प्रदूषण और हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे कई पहलू शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन सभी कारणों पर लगातार काम करने से प्रदूषण की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम से होगी बेहतर निगरानी-योजना के पहले चरण में दिल्ली में अत्याधुनिक एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जाएगा। इसके तहत एक विशेष प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट बनेगी, जो डेटा एनालिटिक्स के जरिए प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करेगी। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से प्रदूषण की लगातार निगरानी होगी, जिससे पता चलेगा कि कब और कहां प्रदूषण ज्यादा हो रहा है और तुरंत कार्रवाई की जा सके।
NCR और पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर काम-दिल्ली की हवा सिर्फ शहर के अंदर की गतिविधियों से प्रभावित नहीं होती, बल्कि आसपास के NCR क्षेत्र और पड़ोसी राज्यों से भी प्रदूषण आता है। इसलिए इस योजना में पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर समन्वय और साझा रणनीति बनाई जाएगी। वैज्ञानिक तरीकों और नई तकनीकों का इस्तेमाल कर पूरे क्षेत्र में प्रदूषण कम करने की कोशिश होगी, ताकि लंबे समय तक साफ हवा मिल सके।
पुराने वाहनों पर सख्ती, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा-परिवहन क्षेत्र से निकलने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए योजना में पुराने वाहनों पर कार्रवाई तेज होगी। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। साथ ही Pollution Under Control (PUC) सिस्टम को आधुनिक बनाया जाएगा ताकि वाहनों के उत्सर्जन की सही निगरानी हो सके। बेहतर बस सेवा और ट्रैफिक प्रबंधन से भी प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।
सड़क की धूल, निर्माण मलबा और कचरा जलाने पर नियंत्रण-सड़क की धूल और निर्माण कार्यों से निकलने वाला मलबा प्रदूषण का बड़ा कारण है। सरकार इन पर विशेष ध्यान देगी। निर्माण मलबे का सही निपटान, नियमित सड़क सफाई और नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। कचरा जलाने और लैंडफिल साइटों पर आग लगने को रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। नगर निगम स्तर पर सफाई व्यवस्था मजबूत करना जरूरी होगा ताकि प्रदूषण पर स्थायी नियंत्रण हो सके।
कई विभाग मिलकर करेंगे काम, जिम्मेदारियां तय होंगी-इस योजना को सफल बनाने के लिए पर्यावरण विभाग, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, परिवहन विभाग, नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली विकास प्राधिकरण, ट्रैफिक पुलिस और विश्व बैंक जैसे कई विभाग और एजेंसियां साथ काम करेंगी। हर विभाग की जिम्मेदारी, लक्ष्य और समय सीमा पहले से तय की जाएगी ताकि काम में समन्वय बना रहे और योजना समय पर पूरी हो।
विश्व बैंक की फंडिंग से बढ़ेगी जवाबदेही-इस योजना की 65 प्रतिशत फंडिंग विश्व बैंक करेगा, जबकि बाकी 35 प्रतिशत दिल्ली सरकार देगी। विश्व बैंक की भागीदारी से न केवल आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि निगरानी और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। विश्व बैंक समर्थित परियोजनाओं में काम की गुणवत्ता और समय पर पूरा होना जरूरी होता है, जिससे उम्मीद है कि यह योजना जमीन पर भी प्रभावी साबित होगी।
क्या बदलेगी दिल्ली की हवा? सफलता अमल पर निर्भर-दिल्ली सरकार की यह योजना आकार और निवेश दोनों में बड़ी है, लेकिन इसकी सफलता सही तरीके से लागू होने पर निर्भर करेगी। अगर सभी विभाग समय पर जिम्मेदारी निभाएं, निगरानी मजबूत रहे और नियमों का पालन हो, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली की हवा में बड़ा सुधार हो सकता है। यह मिशन राजधानी को प्रदूषण से राहत दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



