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राहुल गांधी के देहरादून कार्यक्रम पर सियासत तेज, BJP बोली- जगह की कमी नहीं, कांग्रेस कर रही राजनीति

 

राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर बढ़ा विवाद, कांग्रेस ने जताई नाराजगी-देहरादून में राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। पहले इस कार्यक्रम के लिए परेड ग्राउंड की अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में जिला प्रशासन ने इसे रद्द कर दिया। इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने परेड ग्राउंड में धरना दिया। कांग्रेस का कहना है कि अनुमति वापस लेना गलत है और इससे राजनीतिक गतिविधियों पर असर पड़ता है। इस विवाद ने उत्तराखंड की राजनीति में BJP और कांग्रेस के बीच टकराव को फिर से बढ़ा दिया है।

BJP का पलटवार, बोली- कई वैकल्पिक जगहें पहले ही उपलब्ध कराई गईं-BJP ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन ने कार्यक्रम रोकने की कोई मंशा नहीं दिखाई। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने बताया कि प्रशासन ने कई अन्य स्थान उपलब्ध कराए थे, लेकिन कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि कांग्रेस बेवजह खुद को पीड़ित दिखा रही है और ऐसा लग रहा है जैसे राहुल गांधी कार्यक्रम रद्द करने का बहाना ढूंढ़ रहे हों। BJP का मानना है कि युवा अब इस राजनीति को समझने लगे हैं और ऐसे आरोपों से प्रभावित नहीं होंगे।

अब बन्नू स्कूल मैदान में होगा ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम-विवाद के बीच उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने साफ किया कि राहुल गांधी का कार्यक्रम रद्द नहीं होगा। उन्होंने बताया कि अब यह आयोजन देहरादून के बन्नू स्कूल मैदान में होगा। कांग्रेस का कहना है कि जगह बदलने के बावजूद कार्यक्रम तय समय पर होगा और बड़ी संख्या में छात्र इसमें हिस्सा लेंगे। पार्टी के मुताबिक, इस कार्यक्रम का मकसद छात्रों की समस्याओं, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि स्थान बदलने से कार्यक्रम के उद्देश्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

जिला प्रशासन ने बताई अनुमति रद्द करने की वजह-देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने प्रशासन का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि परेड ग्राउंड में पहले से केंद्र सरकार का एक कार्यक्रम चल रहा था, जो 15 जुलाई तक था, लेकिन बाद में इसे 17 जुलाई तक बढ़ा दिया गया। इसलिए उसी जगह पर दूसरा आयोजन संभव नहीं था। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन का मकसद किसी राजनीतिक कार्यक्रम को रोकना नहीं था, बल्कि पहले से निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार व्यवस्था बनाए रखना था। उन्होंने यह भी कहा कि वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी रही।

कार्यक्रम से पहले तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी-राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले उत्तराखंड की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस इसे राजनीतिक भेदभाव बता रही है, जबकि BJP का कहना है कि प्रशासन ने पूरी पारदर्शिता से फैसला लिया है और किसी कार्यक्रम पर रोक नहीं लगी। अब जब नया स्थान तय हो चुका है, तो सबकी नजर 17 जुलाई को होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर है। माना जा रहा है कि इस दौरान राहुल गांधी शिक्षा व्यवस्था, छात्रों की समस्याओं और हाल के पेपर लीक मामलों पर विस्तार से बात करेंगे। इस कार्यक्रम और विवाद दोनों पर राजनीतिक नजर बनी रहेगी।

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