पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले बड़ा एक्शन: 7 अफसर सस्पेंड, ECI का सख्त संदेश

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले बड़ा प्रशासनिक कदम: सात अधिकारियों को निलंबित किया गया-पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच चुनाव आयोग ने एक साथ सात अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही और शक्तियों के दुरुपयोग के आरोपों के बाद की गई है। इस फैसले ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।
चुनाव से पहले प्रशासन में बढ़ी सख्ती-2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म था। ऐसे में सात अधिकारियों के निलंबन ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
किन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई?-निलंबित सभी अधिकारी असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) थे। इनमें मुर्शिदाबाद के डॉ. सेफाउर रहमान, फरक्का के राजस्व अधिकारी नीतीश दास, मयनागुड़ी की महिला विकास अधिकारी डलिया रे चौधरी, सूती ब्लॉक के शेख मुर्शिद आलम, कैनिंग पूर्व के सत्यजीत दास, जॉयदीप कुंडू और देबरा के संयुक्त बीडीओ देबाशीष बिस्वास शामिल हैं। सभी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर विभागीय जांच शुरू की गई है।
SIR प्रक्रिया में मिली क्या गड़बड़ी?-SIR के तहत मतदाता सूची की जांच और संशोधन होता है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी की और अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में चुनावी कानूनों का उल्लंघन हुआ है। आयोग ने ‘Serious Misconduct’ और ‘Dereliction of Duty’ जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश और आगे की कार्रवाई-आयोग को पुख्ता सबूतों के साथ शिकायतें मिली थीं। पश्चिम बंगाल जैसे संवेदनशील राज्य में चुनाव आयोग किसी भी लापरवाही या पक्षपात को बर्दाश्त नहीं करेगा। निलंबन के साथ ही मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच तुरंत शुरू की जाए। इससे उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की प्रतिबद्धता-चुनाव से पहले यह सख्त कदम यह दर्शाता है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सक्रिय है। मतदाता सूची से जुड़े कामों में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी विवाद को रोकना आयोग की प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी कार्रवाई हो सकती है।
यह कदम पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल को साफ-सुथरा और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।



