मोदी की इजरायल यात्रा से पहले बड़ा समझौता: भारत-इजरायल रक्षा साझेदारी को मिला नया मजबूत आधार

भारत-इजरायल रक्षा सहयोग: मोदी की यात्रा से पहले नया समझौता, साझेदारी को मिलेगी नई ताकत-भारत और इजरायल के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महीने इजरायल यात्रा से पहले दोनों देशों ने एक महत्वपूर्ण समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते से रक्षा क्षेत्र में नई परियोजनाएं, सेमिनार और सहयोगी पहल शुरू होंगी, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक भरोसे को और गहरा करेंगी।
रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाला समझौता-भारत और इजरायल के बीच पहले से चल रहे रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए यह समझौता किया गया है। इसके तहत भविष्य में दोनों देशों के बीच संयुक्त सेमिनार, नई परियोजनाएं और कई सहयोगी पहल शुरू होंगी। यह कदम दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
रक्षा उद्योगों के बीच सीधी बातचीत का रास्ता खुला-इजरायल के रक्षा मंत्रालय की संस्था SIBAT ने भारत और इजरायल की प्रमुख रक्षा कंपनियों के बीच कई अहम बैठकें आयोजित कीं। इन बैठकों का मकसद दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सीधे संपर्क और समझ बढ़ाना था, ताकि भविष्य में संयुक्त परियोजनाओं के लिए मजबूत आधार तैयार हो सके।
सेमिनार में रक्षा कंपनियों ने साझा किया अनुभव-SIBAT, Society of Indian Defence Manufacturers और भारत के रक्षा मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस सेमिनार में दोनों देशों की रक्षा कंपनियों के बीच बिजनेस-टू-बिजनेस बैठकें हुईं। इन बैठकों में नई तकनीकों, अनुभवों और संभावित साझेदारी के अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिससे आपसी सहयोग को नई दिशा मिली।
56 रक्षा कंपनियों की भागीदारी से बढ़ा भरोसा-इस कार्यक्रम में भारत की 30 और इजरायल की 26 रक्षा कंपनियों ने हिस्सा लिया। कंपनियों को भारत की रक्षा उत्पादन प्रणाली और नई रक्षा खरीद प्रक्रिया (DAP 2026) के बारे में भी जानकारी दी गई। इससे दोनों देशों के उद्योगों के बीच बेहतर समझ और भविष्य के सहयोग की संभावनाएं मजबूत हुईं।
वरिष्ठ अधिकारियों ने जताई साझेदारी बढ़ाने की प्रतिबद्धता-भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व SIDM के महानिदेशक रमेश के ने किया, जबकि भारत के राजदूत जे. पी. सिंह और रक्षा अताशे विजय पाटिल भी इसमें शामिल रहे। दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि संकट के समय एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की परंपरा को जारी रखा जाएगा और रक्षा सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।
रक्षा निर्यात और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा-इजरायल के रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह सेमिनार उनकी रणनीतिक योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद इजरायल के रक्षा निर्यात को बढ़ाना और भारत जैसे प्रमुख देशों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करना है। वरिष्ठ अधिकारी Amir Baram इस विजन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
नई तकनीक और संयुक्त उत्पादन पर विशेष ध्यान-पिछले साल नवंबर में हुई संयुक्त कार्य समूह (JWG) की बैठक के बाद यह नया समझौता हुआ है। उस बैठक में दोनों देशों ने रक्षा, उद्योग और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। अब नई तकनीक साझा करने, संयुक्त उत्पादन और विकास पर खास फोकस रहेगा।
मोदी की इजरायल यात्रा से उम्मीदें-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी को दो दिन की इजरायल यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वे रक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। यह यात्रा भारत-इजरायल संबंधों को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देगी।



