बंगाल की सियासत में दिलीप घोष की वापसी, 2026 चुनाव से पहले बीजेपी ने कसी कमर

लंबे वनवास के बाद फिर सक्रिय हुए दिलीप घोष: बंगाल में बीजेपी की नई रणनीति-पश्चिम बंगाल की राजनीति में बीजेपी के दिग्गज नेता दिलीप घोष की वापसी ने सियासी हलचल मचा दी है। लंबे समय तक हाशिए पर रहने के बाद अब वे पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात के बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, जो पार्टी के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
अमित शाह से मुलाकात के बाद बदला सियासी माहौल-अमित शाह के बंगाल दौरे के दौरान हुई लंबी बातचीत ने दिलीप घोष की भूमिका को और मजबूत किया है। 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा हुई, जिसमें शाह ने घोष को चुनावी तैयारियों में अहम जिम्मेदारी दी। इस मुलाकात के बाद पार्टी के अंदर नई ऊर्जा और हलचल देखने को मिली है।
प्रदेश अध्यक्ष के साथ मिलकर करेंगे जनसभाएं-दिलीप घोष ने खुद बताया कि वे प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के साथ मिलकर राज्यभर में जनसभाएं करेंगे। इसका मकसद पार्टी के कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकना और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है। पार्टी चाहती है कि चुनाव से पहले हर जिले में साफ संदेश पहुंचे।
नए साल के पहले दिन ही दिखा एक्शन मोड-1 जनवरी को कोलकाता स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक के बाद दिलीप घोष ने मीडिया से कहा कि 2026 में बीजेपी पश्चिम बंगाल में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी और टीएमसी की सत्ता को उखाड़ फेंकेगी। यह बयान पार्टी के चुनावी जोश को दर्शाता है।
संगठन के लिए क्यों अहम है दिलीप घोष की वापसी-दिलीप घोष को बीजेपी का मजबूत रणनीतिकार माना जाता है। वे कार्यकर्ताओं को एकजुट करने, आक्रामक प्रचार करने और विरोधियों पर सीधे हमले के लिए जाने जाते हैं। उनकी सक्रियता से पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है, जो चुनावी सफलता के लिए जरूरी है।
ममता बनर्जी और टीएमसी पर हमले तेज होने के संकेत-दिलीप घोष हमेशा से ममता बनर्जी और टीएमसी के खिलाफ मुखर रहे हैं। उनकी वापसी से साफ है कि आने वाले दिनों में बीजेपी की सियासी बयानबाजी और आक्रामक होगी। पार्टी मानती है कि ऐसे नेताओं की सक्रियता से चुनावी माहौल अपने पक्ष में किया जा सकता है।
गुटबाजी पर विराम लगाने का संदेश-बीजेपी हाईकमान ने साफ कर दिया है कि चुनाव तक पार्टी में गुटबाजी की कोई जगह नहीं है। दिलीप घोष की वापसी को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट कर 2026 के चुनाव को पूरी ताकत से लड़ना चाहती है। दिलीप घोष की सक्रिय वापसी ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की रणनीति को नया आयाम दिया है। उनकी नेतृत्व क्षमता और चुनावी अनुभव पार्टी को मजबूती देंगे। 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के लिए यह कदम अहम साबित हो सकता है।



