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TMC में फर्जी हस्ताक्षर विवाद: विधायक बोले- पार्टी में नैतिकता की कोई जगह नहीं

TMC में फर्जी हस्ताक्षर विवाद से भड़का बवाल, विधायक बोले- पार्टी में नैतिकता की कोई जगह नहीं
फर्जी हस्ताक्षर विवाद ने TMC की मुश्किलें बढ़ाईं-पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस में फर्जी हस्ताक्षर विवाद ने अंदरूनी तनाव को बढ़ा दिया है। दो विधायकों के निष्कासन के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। निष्कासित विधायक संदीपान साहा ने कहा कि टीएमसी में नैतिकता की बात करना ही अपराध माना जाता है। उनके बयान ने पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों को सार्वजनिक कर दिया है।

संदीपान साहा का बड़ा आरोप, नैतिकता को बताया सजा की वजह-संदीपान साहा ने पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग नैतिकता और पारदर्शिता की बात करते हैं, उन्हें पार्टी विरोधी माना जाता है। उन्होंने कहा कि अगर नैतिकता पर कायम रहने के कारण उन्हें बाहर किया गया है तो उन्हें कोई अफसोस नहीं। साहा ने यह भी साफ किया कि फिलहाल वे किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने का इरादा नहीं रखते।

फर्जी हस्ताक्षर विवाद की पूरी कहानी-यह विवाद उस पत्र को लेकर है जिसमें विपक्ष के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय के समर्थन का दावा किया गया था। संदीपान साहा और अन्य विधायकों का कहना है कि उन्होंने केवल उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए थे, किसी समर्थन पत्र पर नहीं। बाद में उन्हीं हस्ताक्षरों का गलत इस्तेमाल किया गया। मामला अब राजनीतिक से बढ़कर कानूनी रूप ले चुका है।

CID जांच में जुटी, कई नेताओं को नोटिस भेजे गए-राज्य CID इस मामले की जांच कर रही है। कई नेताओं और संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। पार्टी ने संदीपान साहा और ऋतब्रत बनर्जी को प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि वे पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे, जबकि दोनों ने खुद को निर्दोष बताया है।

अभिषेक बनर्जी पर भी उठे गंभीर सवाल-संदीपान साहा ने राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर आरोप लगाया कि उन्होंने बिना हस्ताक्षर वाले लोगों के नाम और हस्ताक्षर शामिल किए। CID ने भी अभिषेक को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा था, लेकिन उनकी गैरहाजिरी ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है।

चुनावी हार के बाद पार्टी में बढ़ा संकट-हाल के विधानसभा चुनावों में हार के बाद TMC पर दबाव बढ़ा है। पार्टी के अंदर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। कई नेताओं ने संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। चुनावी हार के बाद संगठन कमजोर हुआ है, जिसका असर अब अंदरूनी विवादों के रूप में दिख रहा है।

विधायक दल की बैठक में कम उपस्थिति ने बढ़ाई चिंता-ममता बनर्जी की अध्यक्षता में बुलाई गई विधायक दल की बैठक में केवल 19 विधायक ही पहुंचे। 80 में से इतनी कम उपस्थिति ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक जानकार इसे पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी का संकेत मान रहे हैं।

बाहरी दबाव और हमलों ने बढ़ाई राजनीति-अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हुए हमलों ने राजनीतिक माहौल को और गरमाया है। TMC भाजपा पर आरोप लगा रही है कि वह पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। इन घटनाओं ने पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है।

ममता बनर्जी ने बताया राजनीतिक साजिश-ममता बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि कई विधायकों को बैठक में आने से पहले दबाव और धमकियां मिलीं। ममता ने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे स्वतंत्र हैं, लेकिन संगठन मजबूत करने का काम जारी रहेगा।

निष्कासन के बाद विधायकों की स्थिति क्या होगी?-निष्कासित संदीपान साहा और ऋतब्रत बनर्जी अब निर्दलीय विधायकों की तरह काम करेंगे। वे पार्टी के व्हिप या निर्देशों के दायरे में नहीं रहेंगे। उनकी राजनीतिक भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन वे अपने फैसले पर कायम हैं। यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।

 

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