2025 पंजाब के लिए कैसा रहा साल? बाढ़ से सियासत तक, कानून-व्यवस्था से विदेश डिपोर्टेशन तक हर मोर्चे पर उथल-पुथल

2025 में पंजाब: आपदाओं, संघर्षों और बदलावों का साल-साल 2025 पंजाब के लिए कई तरह की चुनौतियों और घटनाओं से भरा रहा। बाढ़ से लेकर राजनीतिक विवाद, कानून-व्यवस्था की समस्याएं और सामाजिक बदलावों ने इस साल को खास बनाया। आइए, इस ब्लॉग में विस्तार से जानें कि कैसे ये घटनाएं पंजाब की तस्वीर को प्रभावित करती हैं।
भीषण बाढ़ ने पंजाब को झकझोरा-अगस्त-सितंबर में आई बाढ़ ने पंजाब के कई जिलों को बुरी तरह प्रभावित किया। गurdaspur, अमृतसर, फिरोजपुर और फाजिल्का में भारी तबाही हुई। 50 से ज्यादा लोगों की जान गई और हजारों घर टूटे। सरकार ने नुकसान का आंकड़ा 13,500 करोड़ रुपये बताया। यह 1988 के बाद सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा मानी जा रही है।
किसानों का आंदोलन और पुलिस की कार्रवाई-मार्च में शंभू और खनौरी बॉर्डर पर बैठे किसानों को पुलिस ने हटाया, जिससे एक साल से बंद सड़कें खुल सकीं। इस कार्रवाई को लेकर सरकार की आलोचना भी हुई और समर्थन भी। किसान इसे अपनी आवाज दबाने की कोशिश मानते हैं, जबकि प्रशासन ने इसे यातायात बहाल करने की जरूरत बताया।
अमेरिका से डिपोर्टेशन और ‘डंकी रूट’ की सच्चाई-2025 में अमेरिका से पंजाब के कई युवाओं को डिपोर्ट किया गया। हथकड़ी में बंधे युवाओं की तस्वीरें सामने आईं, जिसने सबको झकझोर दिया। ‘डंकी रूट’ की चर्चा फिर तेज हुई, जहां युवा बेहतर जिंदगी के सपने में जोखिम उठाते हैं और कर्ज में फंस जाते हैं।
कानून-व्यवस्था पर सवाल और बढ़ती चिंता-सालभर पंजाब में अपराध बढ़े। दुकानों पर फायरिंग, धमकियां और पुलिस स्टेशनों पर ग्रेनेड हमले जैसी घटनाएं सामने आईं। विपक्ष ने सरकार को घेरा और कानून-व्यवस्था सुधारने की मांग की। आम जनता में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बॉर्डर पर हाई अलर्ट-7 मई को भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर मिसाइल स्ट्राइक की। यह पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। इसके बाद पंजाब के सीमावर्ती जिलों में अलर्ट जारी कर दिया गया।
आम आदमी पार्टी को चुनावी सफलता-2025 में AAP ने लुधियाना वेस्ट और तरनतारन उपचुनाव जीते। जिला परिषद और पंचायत समितियों में भी पार्टी को सफलता मिली। यह 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए बड़ा मनोबल साबित हुआ।
राजनीतिक विवाद और बड़े बयान-कांग्रेस नेता नवजोत कौर सिद्धू के “मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए 500 करोड़” वाले बयान ने हलचल मचा दी। पार्टी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर नवजोत सिंह सिद्धू को सीएम बनाया गया तो वे राजनीति में वापसी करेंगी।
बिक्रम मजीठिया की गिरफ्तारी-शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया। मजीठिया ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया और सरकार पर निशाना साधा।
CBI की बड़ी कार्रवाई-अक्टूबर में CBI ने पंजाब पुलिस के DIG हरचरण सिंह भुल्लर को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया। छापे में करोड़ों की नकदी, सोना और महंगी संपत्तियां मिलीं। यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना।
बाढ़ राहत पर सियासी टकराव-प्रधानमंत्री मोदी ने बाढ़ राहत के लिए 1,600 करोड़ की मदद का ऐलान किया। AAP ने केंद्र पर विशेष पैकेज नहीं देने का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी ने कहा कि राज्य के पास पहले से SDRF में 12,000 करोड़ रुपये हैं।
पंजाब यूनिवर्सिटी विवाद-सितंबर में पंजाब यूनिवर्सिटी के सीनेट और सिंडिकेट के पुनर्गठन को लेकर छात्र और राजनीतिक दल सड़कों पर उतरे। बाद में केंद्र सरकार ने फैसला वापस लिया और सीनेट चुनाव की तारीखें तय कीं।
पानी विवाद और हाईकोर्ट की भूमिका-अप्रैल में भाखड़ा डैम से हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने से इनकार पर विवाद बढ़ा। मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा, जिससे दोनों राज्यों के बीच तनाव फिर उभरा।
पुलिस पर गंभीर आरोप-मार्च में पटियाला में एक कर्नल और उनके बेटे से कथित मारपीट का मामला सामने आया। 12 पुलिसकर्मियों पर आरोप लगे और यह मामला राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में रहा।
दिग्गजों का निधन-साल में पंजाब ने कई बड़े हस्तियों को खोया। 114 साल के मैराथन रनर फौजा सिंह का सड़क हादसे में निधन हुआ। सुखदेव सिंह ढिंडसा, अभिनेता जसविंदर भल्ला, राजवीर जवांडा और धर्मेंद्र के निधन से राज्य शोक में डूबा।
अमृतसर जहरीली शराब कांड-मई में अमृतसर में जहरीली शराब पीने से 20 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। इस घटना ने अवैध शराब कारोबार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए।
2025 पंजाब के लिए चुनौतीपूर्ण साल-2025 पंजाब के लिए आपदाओं, राजनीतिक संघर्ष और सामाजिक बदलावों का साल रहा। बाढ़, कानून-व्यवस्था, राजनीतिक विवाद और सामाजिक मुद्दों ने राज्य की तस्वीर को गहराई से प्रभावित किया। आने वाले सालों में इन चुनौतियों से निपटना पंजाब के लिए बड़ी चुनौती होगी।



