ट्रंप की आलोचना पर भारत का जवाब: साझेदारी ने हर चुनौती झेली, आगे भी रहेगी मजबूत

ट्रम्प की टिप्पणी का भारत ने दिया करारा जवाब-अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत पर आरोपों और 25% टैरिफ के ऐलान के बाद भारत ने एक मज़बूत और स्पष्ट जवाब दिया है। यह जवाब सिर्फ़ शब्दों में नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति के दृढ़ संकल्प को भी दर्शाता है।
मज़बूत रिश्ते, मज़बूत जवाब-भारत ने साफ़ शब्दों में कहा है कि भारत-अमेरिका के रिश्ते साझा मूल्यों और आपसी हितों पर टिके हैं। ये रिश्ते कई उतार-चढ़ाव देख चुके हैं, लेकिन आगे भी मज़बूत बने रहेंगे। यह जवाब दिखाता है कि भारत अमेरिका के दबाव में नहीं झुकेगा और अपने हितों की रक्षा करेगा। विदेश मंत्रालय का यह बयान एक संदेश है कि भारत अपने रणनीतिक संबंधों को किसी भी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होने देगा।
रणनीतिक साझेदारी: सिर्फ़ व्यापार से ज़्यादा-भारत और अमेरिका के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है। यह साझेदारी सिर्फ़ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और दोनों देशों के लोगों के बीच मज़बूत संबंधों पर भी आधारित है। यह साझेदारी दोनों देशों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है और दोनों देश मिलकर इसे और मज़बूत बनाने पर काम करेंगे। यह सहयोग कई क्षेत्रों में दिखाई देगा और नए रास्ते तलाशे जाएँगे।
रक्षा सहयोग: एक मज़बूत स्तंभ-भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। यह सहयोग सिर्फ़ सैन्य तकनीक तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच बढ़ता हुआ रक्षा सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। यह सहयोग दोनों देशों के बीच विश्वास और आपसी समझ को भी मज़बूत करता है।
ऊर्जा नीति: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि-भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह से राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बाज़ार में उपलब्ध विकल्पों और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है। यह स्पष्ट संदेश है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर है और अपनी ज़रूरतों के हिसाब से ही ऊर्जा खरीदेगा। यह निर्णय पूरी तरह से भारत के आर्थिक और सामरिक हितों को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा।



