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केतन हत्याकांड: पहली बार बच गए, दूसरी बार क्यों लौटे उसी मौत की जगह?

 

केतन मर्डर केस: पहली बार मौत को मात देने के बाद भी क्यों लौटे उसी किले पर? पुलिस जांच ने खोले भरोसे और साजिश के कई राज-पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब केतन पहली बार लोहागढ़ किले पर हुई घटना में बच गए थे, तो चार दिन बाद फिर उसी जगह क्यों गए? पुलिस की जांच इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूम रही है। जांच एजेंसियां मानती हैं कि इसका जवाब तकनीकी सबूतों में नहीं, बल्कि उस भरोसे में छिपा है जो केतन ने अपनी मंगेतर सिया गोयल पर किया था। पहली घटना के बाद केतन को पता ही नहीं चला कि उनकी जान को खतरा था, और उन्होंने सिया की बताई कहानी पर भरोसा कर लिया। यही भरोसा उनकी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुआ।

पहली घटना में बच गई थी जान, लेकिन खतरे को नहीं समझ पाए केतन-14 जून को केतन अग्रवाल अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ लोहागढ़ किले गए थे। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान सिया ने उन्हें पहाड़ी से धक्का दिया, लेकिन केतन झाड़ियों को पकड़कर बच गए। सिया ने केतन को बताया कि उसने पास में सांप देखा था, इसलिए डर के मारे धक्का दिया। केतन ने इसे एक हादसा समझा और भरोसा कर लिया। उन्होंने न तो सगाई तोड़ी और न ही इस घटना पर शक जताया। पुलिस मानती है कि अगर उस वक्त केतन को सच्चाई पता चलती, तो आगे की घटना टल सकती थी।

चार दिन बाद फिर उसी किले पर पहुंचे और इस बार नहीं बच सके-18 जून को केतन फिर सिया के साथ लोहागढ़ किले गए। इस बार उनके साथ सिया का करीबी दोस्त चेतन चौधरी भी था। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने मिलकर केतन को करीब 400 फीट ऊंचाई से नीचे धक्का दे दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। शुरुआत में इसे दुर्घटना बताया गया, लेकिन परिवार को शक था। पुलिस ने दोबारा जांच की और कई तथ्य सामने आए, जिससे मामला हत्या साबित हुआ। पहली घटना असफल कोशिश थी, जबकि दूसरी बार पूरी साजिश के तहत हत्या की गई।

पुलिस की नजर में भरोसा ही बना सबसे बड़ी वजह-जांच में यह सामने आया कि केतन ने अपनी मंगेतर सिया पर गहरा भरोसा किया था। दोनों की सगाई हुई थी और शादी तय थी, इसलिए किसी को शक करना मुश्किल था। सिया ने पहली घटना को सांप और हादसे की कहानी से जोड़ दिया, जिससे केतन का भरोसा और मजबूत हो गया। पुलिस मानती है कि प्यार में लोग अक्सर सच को नजरअंदाज कर देते हैं। केतन ने खतरे को खतरा नहीं समझा, और यही भरोसा उनकी जान पर भारी पड़ा।

डिजिटल सबूतों से जोड़ रही है पुलिस पूरी कहानी-पुलिस कॉल डिटेल, मोबाइल चैट, डिलीट किए गए मैसेज, सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों की लोकेशन की जांच कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि सिया और चेतन कब से संपर्क में थे और क्या इससे पहले भी केतन को किसी सुनसान जगह ले जाने की कोशिश हुई थी। डिजिटल सबूत इस मामले में अहम भूमिका निभा सकते हैं। दोनों आरोपी गिरफ्तार हैं और जांच जारी है।

परिवार ने उठाई सख्त सजा की मांग, अदालत में होगी असली परीक्षा-केतन के परिवार ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की तैयारी हो रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक बनाया गया है। वहीं बचाव पक्ष कहता है कि अभी तक कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला जो सिया को सीधे हत्या से जोड़े। पुलिस हिरासत में दिए बयान अंतिम सबूत नहीं हो सकते। अब सच्चाई अदालत में पेश सबूतों और गवाहों से तय होगी। इस केस का सबसे बड़ा सवाल यही है कि पहली बार मौत से बचने के बाद भी केतन क्यों लौटे उस जगह? पुलिस का जवाब है—क्योंकि उन्होंने उस इंसान पर भरोसा किया जिसे वह अपना जीवनसाथी मानते थे। यही भरोसा इस केस का सबसे दर्दनाक पहलू है।

 

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