खड़गे का मोदी पर सीधा हमला: “देश के मुश्किल वक्त में प्रचार, विपक्ष का अपमान लोग नहीं सहेंगे”

पीएम मोदी की चुप्पी: सवालों का घेरा-यह लेख हाल ही में घटित घटनाओं पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के विचारों को प्रस्तुत करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुछ नीतियों और प्रतिक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पहलगाम हमला और पीएम की अनुपस्थिति-पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद प्रधानमंत्री की चुप्पी और दो बार बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में उनकी अनुपस्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। खड़गे ने आरोप लगाया कि जब देश संकट से जूझ रहा था, तब प्रधानमंत्री बिहार में चुनाव प्रचार में व्यस्त थे। यह घटना देशवासियों के लिए निराशाजनक रही होगी और नेतृत्व की कमी को दर्शाती है।
सेना की बहादुरी और व्यक्तिगत श्रेय-सेना द्वारा पाकिस्तान में आतंकवादियों के ठिकानों पर की गई कार्रवाई की सराहना करते हुए, खड़गे ने कुछ लोगों द्वारा इस कार्रवाई का व्यक्तिगत श्रेय लेने की कोशिश पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सेना की बहादुरी का श्रेय लेना उचित नहीं है, क्योंकि यह पूरे देश का सामूहिक प्रयास है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर देश को गर्व है और राजनीतिक फायदे के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
विपक्ष की अनदेखी और जनता का गुस्सा-खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने विपक्ष की आवाज को अनसुना किया और सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि यह जनता, खासकर युवाओं, द्वारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह एक गंभीर आरोप है जो सरकार की पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही पर सवाल उठाता है।
अमेरिका से करार और ट्रम्प के टैक्स-अमेरिका के साथ हुए समझौते और ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए गए टैक्स पर भी खड़गे ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, जो देश के हितों के प्रति उनकी गंभीरता पर सवालिया निशान लगाता है। यह एक ऐसी नीतिगत विफलता है जिससे देश को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
ईरान-इजराइल युद्ध और मध्यस्थता की कमी-ईरान-इजराइल संघर्ष में भारत की भूमिका पर भी खड़गे ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत को इस संघर्ष में मध्यस्थता की कोशिश करनी चाहिए थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई पहल नहीं की। यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ भारत की कूटनीतिक क्षमता और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान पर सवाल उठते हैं।
शिक्षा में आरएसएस का प्रभाव और सरकारी नौकरियाँ-खड़गे ने आरोप लगाया कि देश में शिक्षा संस्थानों में आरएसएस का प्रभाव बढ़ रहा है और सरकारी नौकरियों में आरएसएस से जुड़े लोगों को तरजीह दी जा रही है। यह एक ऐसा आरोप है जिससे देश की शिक्षा व्यवस्था और समानता के सिद्धांतों पर सवाल उठते हैं। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर व्यापक चर्चा और जांच की आवश्यकता है।
कांग्रेस की योजनाओं को कमजोर करने की साज़िश-अंत में, खड़गे ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल कांग्रेस की जनकल्याणकारी योजनाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह योजनाएँ गरीबों और जरूरतमंदों तक सीधे पहुँच रही हैं। यह एक ऐसा आरोप है जिस पर विस्तृत जाँच और स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।



