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एक कॉल ने बदली उम्मीदें: नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन की कामयाबी की कहानी

जब जोधपुर के रमेश कुमार को ऑनलाइन मंगाई गई कुर्सियां खराब मिलीं और कंपनी बार-बार पिकअप रद्द करती रही, तब 1915 पर कॉल ने उनकी उम्मीदें फिर से जगा दी। नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन की मदद से उन्हें पूरा रिफंड मिला। यह कहानी 2025 में लाखों उपभोक्ताओं के लिए राहत का प्रतीक बन गई।

2025 के आंकड़े बताते हैं भरोसे का नया रास्ता-अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन ने 67,265 शिकायतें सुलझाईं और ₹45 करोड़ से ज्यादा की रकम उपभोक्ताओं को वापस दिलाई। यह मंच बिना कोर्ट जाए समस्या का समाधान करता है, जिससे आम लोगों को न्याय पाने में आसानी होती है और न्यायिक व्यवस्था पर भी दबाव कम होता है।

ई-कॉमर्स सेक्टर में सबसे ज्यादा शिकायतें-2025 में सबसे ज्यादा शिकायतें ई-कॉमर्स सेक्टर से आईं, करीब 40 हजार। ₹32 करोड़ से ज्यादा का रिफंड हुआ। इसके बाद ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर से ₹3.5 करोड़ की वापसी दर्ज हुई। डिजिटल खरीदारी की बढ़ती लोकप्रियता के साथ-साथ समस्याएं भी बढ़ी हैं, जिन्हें नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन ने प्रभावी ढंग से सुलझाया।

बेंगलुरु से चेन्नई तक समान परेशानियां-बेंगलुरु में एक ग्राहक को इंटरनेट कनेक्शन नहीं मिला, जबकि उसने भुगतान कर दिया था। चार महीने बाद भी कोई समाधान नहीं मिला। नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन की मदद से तुरंत रिफंड हुआ। चेन्नई में फ्लाइट टिकट कैंसिल होने के बाद भी पैसा नहीं लौटा, जिसे हेल्पलाइन ने वापस दिलाया।

कोर्ट से पहले न्याय पाने का आसान तरीका-नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन प्री-लिटिगेशन स्टेज पर काम करती है, जिससे उपभोक्ताओं को कंज्यूमर कोर्ट जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे समय और पैसे की बचत होती है और न्यायिक व्यवस्था पर बोझ भी कम होता है। 2019 के उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत यह एक कारगर विकल्प बन चुका है।

17 भाषाओं में सेवा, हर कोने तक पहुंच-एनसीएच 17 भाषाओं में शिकायत स्वीकार करता है। टोल-फ्री नंबर 1915, व्हाट्सएप, एसएमएस, ईमेल, मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के जरिए देश के किसी भी हिस्से से संपर्क किया जा सकता है। मुंबई से लेकर राजस्थान के दूरदराज इलाकों तक उपभोक्ता अब अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं।

कंपनियों के साथ बेहतर तालमेल से बढ़ी सफलता-2025 में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन की सफलता का बड़ा कारण कन्वर्जेंस पार्टनर्स की संख्या में वृद्धि है। कई कंपनियों और प्लेटफॉर्म्स ने शिकायतें सुलझाने में सहयोग दिया, जिससे उपभोक्ता संरक्षण का सिस्टम ज्यादा जिम्मेदार और प्रभावी बना।

डिजिटल इंडिया में उपभोक्ता अधिकारों की नई पहचान-ई-कॉमर्स से जुड़ी शिकायतें टियर-1 शहरों के साथ छोटे कस्बों से भी आईं। यह दर्शाता है कि डिजिटल कारोबार हर जगह पहुंच चुका है और लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन अब सिर्फ सरकारी हेल्पलाइन नहीं, बल्कि भरोसे का मजबूत मंच बन चुका है।

खामोशी से मिली बड़ी कामयाबी-सरकारी योजना के रूप में शुरू हुई नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन 2025 में लाखों उपभोक्ताओं के लिए न्याय का एक भरोसेमंद रास्ता बन गई। बिना शोर-शराबे के, इस सिस्टम ने साबित कर दिया कि सही व्यवस्था हो तो आम आदमी भी बड़ी कंपनियों के सामने अपनी बात रख सकता है।

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