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H-1B वीजा शुल्क पर ओवैसी का हमला: मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल

अमेरिका का बड़ा फैसला और ओवैसी का तीखा वार: क्या मोदी सरकार की विदेश नीति फेल हो गई?-हैदराबाद के सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख, असदुद्दीन ओवैसी, ने हाल ही में अमेरिकी सरकार के एक नए फैसले पर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। अमेरिका ने अपने नए आदेशों के तहत H-1B वीजा पर लगने वाले सालाना शुल्क में ज़बरदस्त बढ़ोतरी कर दी है। ओवैसी का मानना है कि यह भारत की विदेश नीति की एक बड़ी नाकामी है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने असल में इस वीजा सिस्टम को लगभग खत्म ही कर दिया है, जिसका सबसे बुरा असर भारत पर पड़ेगा। खास तौर पर, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के उन नौजवानों को सबसे ज़्यादा झटका लगेगा जो इस वीजा पर अमेरिका जाकर काम करते हैं। ओवैसी ने व्यंग्य कसते हुए कहा कि सिर्फ जन्मदिन की मुबारकबाद देना या बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित करना विदेश नीति की सफलता नहीं होती। उनके अनुसार, H-1B वीजा को इस तरह से प्रभावित करना सीधे तौर पर भारतीयों को निशाना बनाने जैसा है, और इससे भारत के उन लोगों का भविष्य खतरे में पड़ गया है जो बेहतर अवसरों की तलाश में अमेरिका जाते हैं।

 तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के युवाओं पर सबसे ज्यादा मार-असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए बताया कि जितने भी H-1B वीजा जारी होते हैं, उनमें से लगभग 71-72% वीजा भारतीयों को ही मिलते हैं। और इनमें भी सबसे बड़ी तादाद तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के नौजवानों की है। उन्होंने यह भी बताया कि H-1B वीजा पर काम करने वाले लोग औसतन हर साल करीब 1.20 लाख डॉलर कमाते हैं। यह कमाई न सिर्फ उनके अपने परिवारों के लिए सहारा बनती है, बल्कि भारत के लिए हर साल आने वाले 125 अरब डॉलर के विदेशी पैसे (रेमिटेंस) में भी अहम योगदान देती है। ओवैसी ने चिंता जताई कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लोग भारत के कुल NRI डिपॉजिट का करीब 37% हिस्सा रखते हैं। ऐसे में, अगर यह रास्ता बंद हो जाता है, तो इन परिवारों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाएगी। उनके हिसाब से, यह फैसला केवल नौजवानों के भविष्य के लिए ही बुरा नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक ताक़त को भी कमज़ोर करने वाला है।

मोदी सरकार की कूटनीति पर गंभीर सवाल-ओवैसी ने सीधे तौर पर मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें डोनाल्ड ट्रंप से कोई शिकायत नहीं है, बल्कि वे यह जानना चाहते हैं कि मोदी सरकार ने इस मामले में क्या हासिल किया है। उन्होंने ‘Howdy Modi’ और ‘Namaste Trump’ जैसे बड़े आयोजनों को सिर्फ दिखावा बताया और पूछा कि इन भव्य कार्यक्रमों से भारतीय मूल के लोगों या देश के हित में असल में क्या फायदा हुआ। ओवैसी का कहना है कि सिर्फ जन्मदिन की बधाइयां देना या भारी भीड़ इकट्ठा कर लेना विदेश नीति की सफलता नहीं मानी जा सकती। असली सफलता तो तब है जब भारत के नागरिकों और उनके भविष्य को सुरक्षित रखा जाए। उनका आरोप है कि मोदी सरकार ने अपनी विदेश नीति को सिर्फ नारे लगाने और इवेंट्स तक ही सीमित कर दिया है, जबकि असल में देश के सामने जो चुनौतियां हैं, उनसे आँखें चुराई जा रही हैं।

 अमेरिका-भारत संबंध और बढ़ती मुश्किलें-ओवैसी ने H-1B वीजा के इस मुद्दे को हाल के दिनों में हुई कई घटनाओं की एक कड़ी के तौर पर देखा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत पर भारी टैक्स लगाए, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक समझौता हुआ, और पाकिस्तान और सऊदी अरब के रिश्ते भी मजबूत हुए। इन सबके पीछे अमेरिकी प्रभाव साफ तौर पर देखा जा सकता है। ओवैसी ने चेतावनी दी कि भारत ऐसे समय में खड़ा है जब उसके पड़ोसी देशों के साथ संबंध पहले से ही मुश्किल भरे हैं, और वैश्विक स्तर पर भी भारत धीरे-धीरे अकेला पड़ता जा रहा है। उनका मानना है कि मोदी सरकार की विदेश नीति ने देश को मजबूत बनाने के बजाय उसे असुरक्षा की ओर धकेल दिया है।

 आगे का रास्ता और ओवैसी का सुझाव-हालांकि, आलोचना करने के साथ-साथ ओवैसी ने भारत की आर्थिक रणनीति को एक नई दिशा देने का सुझाव भी दिया है। उन्होंने बताया कि भारत पहले ही 18 से ज़्यादा देशों के साथ भारतीय रुपये में व्यापार करने के समझौते कर चुका है, जिनमें कतर और आसियान देशों जैसे महत्वपूर्ण देश शामिल हैं। उनका सुझाव है कि भारत को इन समझौतों का दायरा और बढ़ाना चाहिए और अपने सभी बड़े व्यापारिक साझेदारों के साथ भारतीय रुपये में ही लेन-देन की व्यवस्था करनी चाहिए। ओवैसी ने कहा कि भारत को अमेरिका के दबाव के आगे झुकना नहीं चाहिए और अपनी आर्थिक आजादी को और मजबूत करना चाहिए।

आम आदमी पर असर और अंतिम बात-ओवैसी ने साफ किया कि उनकी नाराजगी किसी भी तरह के राजनीतिक फायदे के लिए नहीं है, बल्कि वे आम भारतीयों की तकलीफों को देखकर दुखी हैं। उन्होंने कहा कि इस फैसले की मार मोदी पर नहीं, बल्कि आम भारतीयों पर पड़ेगी। उनके अनुसार, सरकार ने अपनी घरेलू राजनीति को चमकाने के लिए विदेश नीति को एक प्रचार का जरिया बना लिया है, और इसके चक्कर में देश के लंबे समय के फायदे दांव पर लग गए हैं। ओवैसी ने इसे एक ‘खोया हुआ दशक’ करार दिया और कहा कि 2014 से 2024 तक की विदेश नीति ने देश को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान ही पहुंचाया है।

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