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यूक्रेन संकट पर PM मोदी और पुतिन की बात, व्यापार से लेकर कूटनीति तक सब पर चर्चा

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 रूस-भारत दोस्ती: पुतिन-मोदी की बातचीत और अमेरिका का दबाव-भारत और रूस के बीच हमेशा से ही अच्छे संबंध रहे हैं, और हाल ही में हुई राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी की फोन पर बातचीत ने इस रिश्ते को और मज़बूत किया है। इस बातचीत में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

मज़बूत होते रिश्ते-मोदी जी ने रूस के साथ संबंधों को और मज़बूत करने की बात कही और साथ ही यूक्रेन संकट पर भारत का रुख भी दोहराया। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि भारत इस संकट का हल सिर्फ़ बातचीत से ही चाहता है। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक रिश्तों को और मज़बूत करने पर भी ध्यान दिया। रूस और भारत के बीच व्यापार, ख़ासकर ऊर्जा, रक्षा और दवाइयों के क्षेत्र में, तेज़ी से बढ़ रहा है और दोनों देश इसे और आगे बढ़ाना चाहते हैं।

अमेरिका का दबाव-लेकिन, इस सबके बीच अमेरिका का दबाव भी है। अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल की ख़रीद पर 50% तक ड्यूटी लगा दी है, जो दुनिया में सबसे ज़्यादा शुल्कों में से एक है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल न ख़रीदे, लेकिन भारत अपने हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले ले रहा है।

रणनीतिक कदम-इससे पहले, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी पुतिन से मुलाक़ात की थी। पुतिन ने कई क्षेत्रीय नेताओं को भी अमेरिका के दूत से हुई अपनी मुलाक़ात की जानकारी दी। इससे साफ़ है कि रूस अपनी रणनीति में क्षेत्रीय देशों को साथ लेकर चलना चाहता है।

आगे का रास्ता-पुतिन और मोदी की बातचीत से साफ़ है कि दोनों देश अपने रिश्तों को और मज़बूत करना चाहते हैं। लेकिन, अमेरिका जैसे देशों के दबाव के बीच भारत को संतुलन बनाए रखना होगा। यह बातचीत वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका को और मज़बूत कर सकती है।

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