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‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ पर सियासी घमासान: खरगे बोले- अव्यवस्था से देश की छवि को नुकसान

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में अव्यवस्था पर सियासी विवाद: कांग्रेस ने सरकार पर लगाया कुप्रबंधन का आरोप-‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ के पहले दिन हुई अव्यवस्था अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह आयोजन “पीआर की भूखी” सरकार की वजह से कुप्रबंधन और अव्यवस्था का शिकार हुआ, जिससे देश की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचा।

समिट के पहले दिन की अव्यवस्था और प्रतिभागियों की शिकायतें-समिट के पहले दिन देश-विदेश से आए प्रतिभागियों ने मोबाइल और इंटरनेट की खराब सेवा, लंबी कतारें, भीड़भाड़ और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी शिकायतें कीं। भारत मंडपम में सुरक्षा इंतजामों के कारण भी लोगों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

खरगे का आरोप: आयोजन की जगह भारत की छवि खराब हुई-मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यह समिट भारत की डिजिटल और AI क्षमताओं को दिखाने का मौका था, लेकिन अव्यवस्था ने सब कुछ खराब कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के फोटो अवसर के लिए आने से हालात और बिगड़ गए। उनका मानना है कि सरकार को बेंगलुरु टेक समिट जैसे सफल आयोजनों से सीख लेनी चाहिए।

खाने-पीने से लेकर डिजिटल भुगतान तक सवाल-खरगे ने यह भी कहा कि प्रदर्शकों को खाने-पीने की सुविधाएं ठीक से नहीं मिलीं और कुछ ने अपने उत्पाद चोरी होने की शिकायत की। डिजिटल इंडिया की बात करने वाले आयोजन में डिजिटल भुगतान की जगह नकद लेन-देन को प्राथमिकता देना भी चिंता का विषय बना। लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैग पर लगी रोक ने प्रतिभागियों को और परेशान किया।

विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी सरकार पर साधा निशाना-कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि यह शायद पहला AI समिट है जहां लैपटॉप तक ले जाने की अनुमति नहीं थी, जिसे उन्होंने “पेटेंट मूर्खता” बताया। कांग्रेस की सोशल मीडिया प्रमुख सुप्रिया श्रीनाटे ने सुरक्षा व्यवस्था की खराबी और इंटरनेट की समस्या पर सवाल उठाए। तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने कहा कि ऐसा आयोजन सभी हितधारकों को साथ लेकर होना चाहिए, न कि केवल फोटो अवसर तक सीमित।

सरकार पर छवि सुधार की राजनीति का आरोप-विपक्ष का आरोप है कि इस आयोजन में असली चर्चा की बजाय प्रचार पर ज्यादा ध्यान दिया गया। उनका कहना है कि देश के असली इनोवेटर्स को निराशा ही हाथ लगी है। फिलहाल सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।

‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ की यह शुरुआत राजनीतिक विवादों के बीच हुई है, जो आने वाले समय में तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में भी सवाल खड़े कर सकती है।

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