Business

रुपया गिरा 18 पैसे, डॉलर के मुकाबले कमजोर – क्यों बढ़ रहा है दबाव?

रुपया क्यों गिर रहा है? विदेशी निवेशक बेच रहे हैं, डॉलर की मांग बढ़ी!

विदेशी निवेशकों की बिकवाली और महीने के आखिर का दबाव-क्या आपने सुना? हमारा प्यारा रुपया इन दिनों थोड़ा कमजोर पड़ गया है। शुक्रवार को तो यह 18 पैसे गिरकर 87.76 पर पहुँच गया था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी सीधी वजह है विदेशी निवेशकों (FPI) का लगातार भारतीय बाज़ार से पैसा निकालना और साथ ही, महीने के अंत में डॉलर की बढ़ती मांग। सोचिए, सिर्फ अगस्त के महीने में ही इन विदेशी निवेशकों ने करीब 34,733 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेच दिए! यह सब हमारे घरेलू बाज़ार और मुद्रा पर भारी पड़ रहा है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि अमेरिकी डॉलर की थोड़ी नरमी ने रुपये को और ज़्यादा गिरने से बचा लिया है।

अमेरिकी टैरिफ का असर और महंगाई का डर-अब बात करते हैं अमेरिका की। जानकारों का कहना है कि ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए नए टैरिफ (शुल्क) कहीं न कहीं हमारे भारतीय निर्यात को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसका सीधा मतलब यह होगा कि हमारा व्यापार घाटा और भी बढ़ सकता है। जब आयात महंगा होगा, तो स्वाभाविक रूप से रुपये पर दबाव बढ़ेगा और हमें घरेलू बाज़ार में महंगाई का सामना भी करना पड़ सकता है। फिलहाल, एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि रुपया 87.40 से 87.90 के बीच ही रहेगा। लेकिन अगर हालात बिगड़ते हैं, तो हमारी रिजर्व बैंक (RBI) बाज़ार में डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की पूरी कोशिश करेगी।

सरकार और आरबीआई की रणनीति-हमारी रिजर्व बैंक ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में यह साफ कर दिया है कि अमेरिका की नीतियों में जो अनिश्चितता है, वह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती पेश कर सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि फिलहाल महंगाई उतनी चिंताजनक नहीं है जितनी पहले लग रही थी। दूसरी तरफ, हमारी सरकार भी निर्यातकों को राहत देने के लिए कमर कस रही है। इसके लिए एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन जैसे नए कदम उठाए जा सकते हैं या फिर लोन पर कुछ समय के लिए राहत (मोरेटोरियम) दी जा सकती है। इन सब कदमों का मकसद यही है कि अमेरिकी टैरिफ के असर को कम किया जा सके।

ग्लोबल मार्केट से भी मिल रहे संकेत-सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के बाज़ार से भी ऐसे संकेत मिल रहे हैं जो रुपये की चाल पर असर डाल रहे हैं। शुक्रवार को डॉलर इंडेक्स में 0.18% की बढ़ोतरी देखी गई, जिससे यह 97.99 पर पहुँच गया। वहीं, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत थोड़ी घटकर 68.17 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। हमारे घरेलू शेयर बाज़ारों में भी शुरुआत में थोड़ी तेज़ी देखी गई थी। सेंसेक्स 197 अंक चढ़कर 80,277 पर और निफ्टी 63 अंक बढ़कर 24,564 पर खुला था। लेकिन, विदेशी निवेशकों की इतनी बड़ी बिकवाली ने निवेशकों की चिंता को बढ़ा दिया है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button