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शरद पवार का फडणवीस को फोन: गोपिचंद पडालकर की टिप्पणी पर नाराज़गी

पवार भड़के, सीएम से की तीखी बात: आखिर क्या है माजरा?

पवार की सीएम से सीधी नाराजगी: महाराष्ट्र की संस्कृति पर सवाल?-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के मुखिया शरद पवार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से खासे नाराज हैं। दरअसल, भाजपा विधायक गोपिचंद पडालकर के एक बयान ने पवार को इतना आहत किया कि उन्होंने खुद सीएम को फोन लगाया। पवार ने साफ तौर पर कहा कि ऐसे बयान महाराष्ट्र की प्रगतिशील और मिलनसार संस्कृति के बिल्कुल भी अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महाराष्ट्र हमेशा से ही आगे बढ़कर सोचने वालों का प्रदेश रहा है और इस तरह की बातें यहाँ की सदियों पुरानी परंपराओं को ठेस पहुँचाती हैं।

सांगली के जाट में क्या हुआ था विवाद?-यह पूरा मामला सांगली जिले की जाट विधानसभा सीट से जुड़ा है, जहाँ गोपिचंद पडालकर ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए विवादित टिप्पणी की थी। यह बयान सीधे तौर पर एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल के परिवार को निशाना बनाकर दिया गया था। जयंत पाटिल, जो लंबे समय तक महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रहे हैं और हाल तक प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाले हुए थे, उनके पिता राजाराम पाटिल पश्चिम महाराष्ट्र के सहकारिता आंदोलन के एक बड़े स्तंभ माने जाते थे।

कोल्हापुर दौरे पर सीएम को लगाया फोन: क्यों जताई चिंता?-सूत्रों के अनुसार, शरद पवार उस समय कोल्हापुर के दौरे पर थे। इसी दौरान, उन्होंने शुक्रवार की सुबह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से फोन पर संपर्क साधा और इस पूरे मुद्दे पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। पवार ने इस बात पर बल दिया कि ऐसे बयान समाज में गलतफहमी फैलाते हैं और राजनीतिक माहौल को भी दूषित करते हैं। उन्होंने सरकार से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

महाराष्ट्र की पहचान पर पवार का जोर: सद्भाव ही असली ताकत-अपनी बातचीत में, शरद पवार ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि महाराष्ट्र की असली पहचान उसके प्रगतिशील विचारों और आपसी सामाजिक सद्भाव में निहित है। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल व्यक्तिगत रूप से अपमानजनक हैं, बल्कि पूरे राज्य की छवि को भी धूमिल करती हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए उचित और प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि राज्य की गरिमा बनी रहे।

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