अजित पवार के बाद कौन संभालेगा कमान? सूनैत्रा पवार को बड़ी जिम्मेदारी देने की उठी मांग

अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी में सूनैत्रा पवार की भूमिका और भविष्य की राजनीति-महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के प्रमुख नेता अजित पवार के अचानक निधन के बाद पार्टी और पवार परिवार में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस मुश्किल वक्त में उनकी पत्नी और राज्यसभा सांसद सूनैत्रा पवार पर सभी की निगाहें टिकी हैं। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि इस बदलाव के बाद एनसीपी की राजनीति किस दिशा में जा सकती है और सूनैत्रा पवार की भूमिका क्या हो सकती है।
संकट के समय में सूनैत्रा पवार की जिम्मेदारी-अजित पवार के निधन से पार्टी के सामने नेतृत्व का बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। उनके समर्थक और कई नेता चाहते हैं कि सूनैत्रा पवार इस मुश्किल घड़ी में आगे आएं और पार्टी की कमान संभालें। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि दोनों एनसीपी गुटों के बीच फिर से एकजुटता हो सकती है, जो अजित पवार की अधूरी इच्छा मानी जा रही है। इस संदर्भ में सूनैत्रा पवार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
शरद पवार की निर्णायक भूमिका-पवार परिवार के मुखिया और एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार को पार्टी के भविष्य के फैसलों में निर्णायक माना जाता है। हालांकि उन्होंने अभी तक दोनों गुटों के विलय पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है, लेकिन अजित पवार के निधन के बाद सभी की नजरें उन्हीं पर टिकी हैं। शरद पवार के फैसले से ही पार्टी का अगला रास्ता तय होगा।
अंतिम संस्कार के बाद उठी सूनैत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग-अजित पवार के अंतिम संस्कार के बाद उनके समर्थकों ने जोर देकर कहा कि अब सूनैत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूनैत्रा वहिनी ही पार्टी का नेतृत्व करें और सभी को सही दिशा दिखाएं। बेटे पार्थ और जय पवार द्वारा अंतिम संस्कार के बाद यह मांग और भी तेज हो गई।
पार्टी में उत्तराधिकारी को लेकर असमंजस-एनसीपी फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन पार्टी के पास कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी योजना नहीं है। अजित पवार के जाने से पार्टी में एक बड़ा नेतृत्व का खालीपन पैदा हो गया है, जिसे भरना आसान नहीं है। इस कारण पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ रहा है कि वे जल्द ही कोई ठोस निर्णय लें।
सूनैत्रा पवार और सुप्रिया सुले के बीच राजनीतिक टकराव-2024 के लोकसभा चुनाव में अजित पवार ने अपनी पत्नी सूनैत्रा पवार को अपनी भतीजी और मौजूदा सांसद सुप्रिया सुले के खिलाफ मैदान में उतारा था, जिसमें सुप्रिया सुले विजयी रहीं। हालांकि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद शोक की घड़ी में दोनों एक-दूसरे के साथ नजर आईं, जिससे परिवार के रिश्तों की एक अलग तस्वीर सामने आई।
वरिष्ठ नेताओं की मुलाकात और राजनीतिक अटकलें-अजित पवार के अंतिम संस्कार के बाद एनसीपी के कई वरिष्ठ नेता जैसे प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और धनंजय मुंडे सूनैत्रा पवार से मिलने पहुंचे। आधिकारिक तौर पर इसे शिष्टाचार भेंट कहा गया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे भविष्य की रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही कोई बड़ा फैसला कर सकती है।
राजनीतिक दिग्गजों की मौजूदगी से बढ़े राजनीतिक संकेत-अजित पवार के अंतिम संस्कार में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे जैसे बड़े नेता शामिल हुए। उनकी उपस्थिति ने संकेत दिया कि महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव हो सकते हैं।
खुले मंच से सूनैत्रा पवार के नाम की पैरवी-अजित पवार के करीबी नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा कि सूनैत्रा पवार को पार्टी की अगुवाई करनी चाहिए और उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यही अजित पवार की विरासत को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। यह बयान पार्टी के भीतर इस मांग को मजबूत समर्थन देता है।
विलय पर फैसला चुनावों के बाद संभव-राजनीतिक संकेतों के मुताबिक, जिला परिषद और ग्राम पंचायत चुनावों के बाद एनसीपी और एनसीपी (एसपी) के विलय पर औपचारिक बातचीत हो सकती है। फिलहाल दोनों पार्टियां ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह पर मिलकर चुनाव लड़ रही हैं। चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक स्थिति और स्पष्ट होगी।
सूनैत्रा पवार के सामने दो विकल्प-अगर सूनैत्रा पवार महाराष्ट्र सरकार में शामिल होती हैं, तो उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा देकर बारामती से चुनाव लड़ना होगा। वहीं, अगर वे राज्यसभा में बनी रहती हैं, तो उनके बेटे पार्थ या जय पवार में से किसी एक को विधानसभा में उतारा जा सकता है। दोनों ही विकल्पों में पवार परिवार की राजनीति नए मोड़ पर आ जाएगी।
पार्थ और जय पवार की तैयारी और पार्टी की मजबूरी-पार्थ पवार 2019 में मावल से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीत नहीं पाए थे। वहीं, जय पवार के राजनीतिक डेब्यू पर भी पार्टी विचार कर रही है। दोनों के पास अभी ज्यादा प्रशासनिक अनुभव नहीं है, इसलिए फिलहाल सूनैत्रा पवार को अंतरिम पार्टी अध्यक्ष बनाकर नेतृत्व में बदलाव लाने की कोशिश की जा सकती है।



