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ओमान तट पर अमेरिकी हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत, परिवारों का दर्द और अंतरराष्ट्रीय कानून पर उठे सवाल

ओमान के तट के पास अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यह घटना न केवल उनके परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति लेकर आई है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून, सुरक्षा और भारत-अमेरिका संबंधों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर गई है। यह हमला एक व्यापारिक जहाज पर हुआ, जिसमें भारतीय चालक दल के सदस्य थे। भारत सरकार ने अमेरिका के सामने कड़ा विरोध जताया है, और संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ओमान के तट पर क्या हुआ था, कैसे हुई यह दुखद घटना?-
10 जून 2026 को ओमान के तट के पास पलाऊ ध्वज वाले कमर्शियल टैंकर एमटी सेटेबेलो पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई हुई। जहाज पर 24 भारतीय नाविक थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित निकाला गया, जबकि तीन की मौत हो गई। अमेरिका का दावा है कि जहाज ने उनके निर्देशों का पालन नहीं किया, जबकि भारत और विशेषज्ञ इसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दा मानते हैं। यह घटना अब सिर्फ सैन्य ऑपरेशन नहीं, बल्कि वैश्विक विवाद का रूप ले चुकी है।

23 साल के आदित्य शर्मा का अधूरा सपना-हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर के 23 वर्षीय आदित्य शर्मा डेक कैडेट थे, जो समुद्री क्षेत्र में करियर बनाना चाहते थे। परिवार के अनुसार आदित्य अपने दादा-दादी के बेहद करीब थे और घर का सहारा थे। हमले से कुछ दिन पहले उन्होंने बताया था कि अमेरिकी नौसेना लगातार चेतावनी दे रही है। आदित्य की मौत ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है। परिवार न्याय और पार्थिव शरीर की जल्द वापसी की मांग कर रहा है।

शिवानंद चौरसिया: परिवार का सहारा अचानक छिन गया-उत्तर प्रदेश के देवरिया के शिवानंद चौरसिया जहाज के इंजन रूम में इंजन फिटर थे। हमला इसी हिस्से पर सबसे पहले हुआ, जिससे उन्हें बचने का मौका नहीं मिला। शिवानंद परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। हमले से एक दिन पहले उनकी बातचीत हुई थी, जिसमें वे घर लौटने की बात कर रहे थे। अब परिवार आर्थिक और भावनात्मक संकट में है और न्याय की उम्मीद लगाए हुए है।

चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश की जिम्मेदारी निभाते-निभाते गई जान-आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम के 44 वर्षीय पटनाला सुरेश जहाज के चीफ इंजीनियर थे। उनके पास 15 साल का अनुभव था। घटना के वक्त वे जनरेटर की तकनीकी समस्या ठीक कर रहे थे, तभी हमला हुआ। उनका शव बाद में बरामद हुआ। परिवार सरकार से अनुरोध कर रहा है कि पार्थिव शरीर जल्द भारत लाया जाए। यह परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है।

क्या अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हुआ? विशेषज्ञों ने उठाए सवाल-विशेषज्ञों का कहना है कि खुले समुद्र में किसी व्यापारिक जहाज पर सैन्य हमला गंभीर मामला है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत देखा जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार बल प्रयोग केवल सीमित परिस्थितियों में ही हो सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठन इस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा पूरी दुनिया की जिम्मेदारी है।

भारत सरकार का सख्त रुख, अमेरिका के सामने विरोध दर्ज-भारत सरकार ने अमेरिका के सामने कड़ा विरोध जताया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से बातचीत कर भारतीय नागरिकों की मौत पर चिंता जताई। भारत ने कहा कि व्यापारिक जहाजों पर सैन्य कार्रवाई स्वीकार्य नहीं। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर विरोध दोहराया। सरकार ने क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने और भारतीय नौसेना को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

अमेरिका ने क्या कहा और क्यों बना विवाद?-अमेरिकी सेना का कहना है कि जहाज ने क्षेत्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन किया और चेतावनी के बाद कार्रवाई की गई। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य हमला अंतिम विकल्प होना चाहिए, खासकर जब जहाज पर विभिन्न देशों के नागरिक हों। इस कारण विवाद बढ़ा है और दुनिया इस मामले की जांच का इंतजार कर रही है।

तीन परिवारों का दर्द और दुनिया के सामने सवाल-आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में व्यापारिक जहाज सुरक्षित हैं? क्या वैश्विक शक्तियां आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं? क्या भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकते हैं? यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि हजारों भारतीय समुद्री कर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे क्या कदम उठाए जाएंगे और परिवारों को कितना न्याय मिलेगा।

 

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