Sansad Ratna Awards 2025: जानिए किन सांसदों ने संसद में लाजवाब प्रदर्शन कर पाया देश का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक सम्मान

संसद रत्न पुरस्कार 2025: लोकतंत्र के हीरो का सम्मान!– भारत के लोकतंत्र की रक्षा और मजबूती में संसद के सांसदों का योगदान अद्भुत है। हर साल, ‘संसद रत्न पुरस्कार’ ऐसे ही समर्पित सांसदों को सम्मानित करता है। 2025 में, 17 सांसदों और 2 संसदीय समितियों को यह सम्मान दिया गया है! जुलाई 2025 के आखिरी हफ़्ते में दिल्ली में होने वाले समारोह में इन सभी को सम्मानित किया जाएगा।
एक पारदर्शी प्रक्रिया- यह पुरस्कार 2010 में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के विचार से शुरू हुआ था। चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। लोकसभा और राज्यसभा के आंकड़ों और PRS Legislative Research की रिपोर्टों के आधार पर सांसदों के काम का मूल्यांकन होता है। संसद में बहस में हिस्सा लेना, सवाल पूछना, और निजी विधेयक पेश करना जैसे मानदंडों को देखा जाता है। एक जूरी, जिसकी अध्यक्षता इस बार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहीर ने की, इस पूरी प्रक्रिया की देखरेख करती है।
लगातार बेहतरीन काम करने वालों को सम्मान- चार सांसदों को “संसदीय लोकतंत्र में लगातार बेहतरीन योगदान” के लिए विशेष सम्मान मिला है। ये सांसद 16वीं, 17वीं और 18वीं लोकसभा में लगातार शानदार काम कर रहे हैं। इनमें भर्तृहरि महताब (ओडिशा), एन. के. प्रेमचंद्रन (केरल), सुप्रिया सुले (महाराष्ट्र), और श्रीरंग अप्पा बारणे (महाराष्ट्र) शामिल हैं। इन सभी ने संसद में अपनी गहरी समझ और जनता के मुद्दों को उठाने की क्षमता से सबको प्रभावित किया है।
अन्य सम्मानित सांसद- इन चार के अलावा, 13 और सांसदों को उनके काम के लिए सम्मानित किया गया है। इनमें स्मिता वाघ, अरविंद सावंत, नरेश म्हस्के, वर्षा गायकवाड़, डॉ. मेधा कुलकर्णी, प्रवीण पटेल, रवि किशन, डॉ. निशिकांत दुबे, बिद्युत महतो, पी. पी. चौधरी, मदन राठौर, सी. एन. अन्नादुरई, और दिलीप सैकिया शामिल हैं। इन सभी ने संसद में अपनी सक्रियता और जनता की आवाज़ बनकर अपनी पहचान बनाई है।
संसदीय समितियों का सम्मान- इस साल, दो संसदीय समितियों को भी सम्मानित किया गया है। वित्त पर स्थायी समिति और कृषि पर स्थायी समिति ने जनहित के मुद्दों पर बेहतरीन काम किया है।
राज्यवार नज़रिया- 2025 के पुरस्कार में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा, जहाँ से 7 सांसदों को सम्मान मिला। उत्तर प्रदेश, झारखंड और राजस्थान से 2-2 सांसद, और ओडिशा, तमिलनाडु, केरल और असम से 1-1 सांसद को सम्मान मिला है। संसद रत्न पुरस्कार सिर्फ़ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उन सांसदों की पहचान है जो लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। यह पुरस्कार संसद में मेहनत, नियमित उपस्थिति और जनता के मुद्दों को उठाने के महत्व को दर्शाता है।



