BJP में बवाल: ‘देशद्रोही’ कहे गए बदगुजर की एंट्री पर खुद पार्टी में मचा घमासान

शिवसेना से भाजपा: बदगुजर का विवादित प्रवेश-सुधाकर बदगुजर के भाजपा में शामिल होने से पार्टी के अंदर ही घमासान मच गया है। क्या है पूरा मामला, जानते हैं विस्तार से।
नासिक नेता का विरोध-नासिक के नेता सुधाकर बदगुजर के भाजपा में शामिल होने की खबर से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर कार्यकर्ताओं तक में असमंजस और विरोध है। स्थानीय नेता और कार्यकर्ता इस फैसले से नाखुश हैं। प्रदेश अध्यक्ष को भी इस बारे में जानकारी नहीं थी, जिससे पार्टी के भीतर ही सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये फैसला ऊपर से लिया गया था या बिना किसी समन्वय के? क्या स्थानीय नेताओं की राय को अनदेखा किया गया? यह सवाल पार्टी के भीतर ही बहस का विषय बना हुआ है। यह घटना पार्टी के भीतर की राजनीति और नेतृत्व में समन्वय की कमी को उजागर करती है।
बीजेपी विधायक का कड़ा विरोध-नासिक वेस्ट से बीजेपी विधायक सीमा हिराय ने बदगुजर के भाजपा में शामिल होने का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने बदगुजर को ‘देशद्रोही’ तक कह दिया और कहा कि उन्होंने खुद उनके खिलाफ प्रदर्शन किया था। हिराय का कहना है कि बदगुजर पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और उन्होंने उनके खिलाफ चुनाव भी लड़ा था। उनका विरोध यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर बदगुजर के प्रवेश को लेकर एक आम सहमति नहीं है और यह फैसला ऊपर के स्तर से लिया गया लगता है। हिराय का बयान पार्टी के भीतर की मतभेदों और विरोधों को दर्शाता है।
93 मुंबई ब्लास्ट आरोपी के साथ डांस वीडियो-बदगुजर का एक पुराना वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वे 1993 मुंबई ब्लास्ट के आरोपी सलीम ‘कुत्ता’ के साथ डांस करते दिख रहे थे। यह वीडियो फिर से चर्चा में आ गया है और बदगुजर के भाजपा में शामिल होने पर सवाल खड़े कर रहा है। यह वीडियो भाजपा और शिवसेना (UBT) दोनों के लिए राजनीतिक हथियार बन गया है। यह घटना दिखाती है कि कैसे पुराने विवाद वर्तमान राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
शिवसेना से बगावत के बाद भाजपा में प्रवेश-मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद बदगुजर के भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं। शिवसेना (UBT) ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। उनके समर्थकों के मुंबई जाने से पता चला कि कुछ बड़ा होने वाला है, लेकिन भाजपा के भीतर ही विरोध शुरू हो गया। यह घटना दिखाती है कि कैसे राजनीतिक दलों में नेताओं का आना-जाना आम बात है, लेकिन इससे पार्टी के भीतर ही मतभेद भी पैदा हो सकते हैं।
प्रदेश अध्यक्ष का अनभिज्ञता का दावा-प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि उन्हें बदगुजर के भाजपा में शामिल होने की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा में बड़े फैसले स्थानीय नेताओं की सहमति से होते हैं, लेकिन नासिक से विरोध सामने आया है। यह बयान पार्टी के भीतर संचार और समन्वय की कमी को दर्शाता है। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या पार्टी के भीतर कुछ बातें बंद दरवाजों के पीछे चल रही हैं।
चुनाव से पहले संकट-स्थानीय निकाय चुनावों के नजदीक बदगुजर जैसे नेता का आना पार्टी के लिए संकट बन गया है। बावनकुले ने माना कि जो नेता पहले विरोधी था और अब पार्टी में आ गया है, इससे स्थानीय स्तर पर नाराजगी हो सकती है। यह राजनीति में नेताओं के आना-जाना और स्थानीय कार्यकर्ताओं की भावनाओं का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
बदगुजर का दावा और संजय राउत की दूरी-बदगुजर ने कहा कि मुंबई आने पर सब पता चल जाएगा। संजय राउत ने उनसे दूरी बना ली है और कहा कि अब उनका उनसे कोई लेना-देना नहीं है। यह घटना दिखाती है कि राजनीति में कैसे रिश्ते बदलते हैं और कैसे नेता अपने हितों के अनुसार फैसले लेते हैं।



