12वीं बार लाल किले से PM मोदी का संबोधन: इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड तोड़ा, अब नेहरू से सिर्फ 5 भाषण पीछे

मोदी का लाल किले से 12वीं बार संबोधन: एक नया कीर्तिमान!
ऐतिहासिक उपलब्धि: लगातार 12वीं बार लाल किले से देश को संबोधित-इस स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और ऐसा कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है, जो वाकई काबिले तारीफ है। उन्होंने लगातार 12वीं बार लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित किया। इस ऐतिहासिक पल के साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अब लाल किले से सबसे अधिक बार स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देने के मामले में प्रधानमंत्री मोदी से आगे सिर्फ भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ही हैं, जिन्होंने लगातार 17 बार देश को संबोधित किया था। इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल में कुल 16 बार यह महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त किया था, जिनमें से 11 बार उन्होंने लगातार भाषण दिए थे। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री मोदी के लंबे और सफल राजनीतिक सफर में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है, जो उनके नेतृत्व क्षमता और जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
पूर्व प्रधानमंत्रियों के रिकॉर्ड पर एक नजर: किसने कितने बार फहराया तिरंगा?-लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देने की यह परंपरा 1947 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ ही शुरू हुई थी। उन्होंने अपने कार्यकाल में लगातार 17 बार देश को संबोधित कर एक ऐसा बेंचमार्क स्थापित किया, जिसे पार करना आसान नहीं था। उनके बाद लाल बहादुर शास्त्री ने 2 बार, मोरारजी देसाई ने भी 2 बार, और चौधरी चरण सिंह ने 1 बार यह जिम्मेदारी संभाली। इंदिरा गांधी ने कुल 16 बार भाषण दिया, जिसमें 11 बार का उनका लगातार रिकॉर्ड उल्लेखनीय है। राजीव गांधी ने 5 बार, वीपी सिंह ने 1 बार, पीवी नरसिंहा राव ने 4 बार, और एचडी देवगौड़ा व आईके गुजराल ने 1-1 बार देश को संबोधित किया। अटल बिहारी वाजपेयी जैसे करिश्माई नेता ने 6 बार और मनमोहन सिंह ने 10 बार लगातार यह दायित्व निभाया। पिछले साल, प्रधानमंत्री मोदी ने मनमोहन सिंह के 10 बार के रिकॉर्ड को पार करते हुए 11वीं बार लाल किले से भाषण दिया था, और अब 12वीं बार के साथ उन्होंने एक नया अध्याय लिखा है।
प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों की अनूठी शैली: विकास और आम आदमी का एजेंडा-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण हमेशा से देश के सामने मौजूद महत्वपूर्ण मुद्दों और विकास की दिशा पर केंद्रित रहे हैं। उनके संबोधनों में अक्सर नई योजनाओं की घोषणाएं और महत्वपूर्ण नीतिगत पहलों का जिक्र होता है, जो देश के भविष्य की राह तय करते हैं। पिछले साल, उन्होंने लगभग 98 मिनट का भाषण देकर सबसे लंबा भाषण देने का अपना ही एक और रिकॉर्ड बनाया था। 2024 के भाषण में, प्रधानमंत्री मोदी ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) की पुरजोर वकालत की और पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव पर भी जोर दिया। उनके भाषण की सबसे खास बात यह है कि इसमें भावनाओं का ज्वार तो होता ही है, साथ ही ठोस नीतिगत दिशा-निर्देश भी मिलते हैं, जिससे वे सीधे आम आदमी के दिलों को छूने में कामयाब होते हैं और उन्हें देश के विकास में अपना योगदान देने के लिए प्रेरित करते हैं।



