जिला अस्पताल में चूहों का आतंक, सिविल सर्जन के बयान पर उठा सवालों का तूफान

जबलपुर जिला अस्पताल के ICU में चूहों की मौजूदगी से मचा हड़कंप- जबलपुर के जिला अस्पताल के ICU वार्ड में चूहों की मौजूदगी ने मरीजों और उनके परिजनों में डर और नाराजगी फैला दी है। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की लापरवाही ने मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना ने पूरे अस्पताल सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।
सिविल सर्जन के बयान ने बढ़ाई विवाद की आग- जब इस मामले पर अस्पताल के सिविल सर्जन नवीन कोठारी से सवाल किए गए, तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि अस्पताल में चल रहे निर्माण कार्य के कारण चूहे बाहर निकल रहे हैं। साथ ही उन्होंने चूहों और सांपों को अस्पताल का “मूल निवासी” तक कह दिया, जिससे लोगों में गुस्सा और बढ़ गया।
सफाई की जिम्मेदारी ठेकेदार पर डालने से उठे सवाल- सफाई व्यवस्था पर सवाल उठने पर सिविल सर्जन ने जिम्मेदारी सीधे सफाई ठेकेदार पर डाल दी। उनका कहना था कि अस्पताल की सफाई की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार की है। इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि अगर जिम्मेदारी तय है, तो मरीजों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे।
स्टाफ बढ़ाने की बात, लेकिन समस्या का समाधान नहीं- सिविल सर्जन ने कहा कि वार्ड में स्टाफ की संख्या बढ़ाई जाएगी, लेकिन चूहों की समस्या को खत्म करने के लिए कोई ठोस योजना सामने नहीं आई। चूहों को अस्पताल का हिस्सा बताने वाले बयान से यह साफ हो गया कि प्रबंधन इस गंभीर समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
मरीज के सिर के पास चूहे घूमते हुए वायरल हुआ वीडियो- कुछ दिन पहले विक्टोरिया जिला अस्पताल के ICU का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें मरीज के सिर के पास चूहे घूमते दिखे। मरीज के परिजनों ने यह वीडियो बनाया था, जिसने इस गंभीर समस्या को उजागर किया। ऐसे हालात में मरीजों को चैन से सोना भी मुश्किल हो गया है।
सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल- इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की सफाई और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जहां मरीज इलाज के लिए आते हैं, वहां चूहों का आतंक भरोसे को कमजोर करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में सिर्फ बयानबाजी करता है या वाकई में सुधार के लिए सख्त कदम उठाता है। जबलपुर जिला अस्पताल के ICU में चूहों की मौजूदगी ने मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिविल सर्जन के विवादित बयान और प्रबंधन की उदासीनता ने स्थिति को और खराब किया है। अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द सुधारात्मक कदम उठाए।



