केरल में धान बोनस पर सियासत तेज: राजीव चंद्रशेखर ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र, राज्य और केंद्र आमने-सामने

केरल के धान किसानों को मिलने वाले बोनस पर नया विवाद, केंद्र और राज्य आमने-सामने- केरल में धान किसानों को मिलने वाले अतिरिक्त बोनस को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर केंद्र की उस सलाह को वापस लेने की मांग की है, जिसमें राज्य सरकार से बोनस बंद करने पर विचार करने को कहा गया था। इस मुद्दे ने केंद्र और राज्य के बीच मतभेद को साफ कर दिया है।
केंद्र का पत्र और राज्य सरकार की कड़ी आपत्ति-9 जनवरी को केंद्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय सचिव ने केरल के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर राज्य की बोनस नीति की समीक्षा करने को कहा था। पत्र में कहा गया कि चावल का स्टॉक सार्वजनिक वितरण प्रणाली की जरूरत से ज्यादा हो गया है, जिससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और एलडीएफ सरकार ने इसे किसानों और राज्य के खिलाफ केंद्र का नकारात्मक रवैया बताया और कड़ी आलोचना की।
किसानों की मुश्किलों पर बीजेपी का नजरिया-राजीव चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने धान किसानों की असली समस्याओं जैसे उत्पादन लागत, खरीद व्यवस्था और बाजार समर्थन को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक मदद समय पर न मिलने से किसान निजी साहूकारों पर निर्भर हो रहे हैं, जिससे कर्ज और दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि केरल ने न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर वैसा बोनस नहीं दिया जैसा अन्य राज्यों में होता है।
केरल की खास कृषि स्थिति का तर्क-चंद्रशेखर ने कहा कि केरल में धान की खरीद अलग तरीके से होती है क्योंकि यहां की जलवायु, छोटी जोतें और कम उत्पादन अन्य राज्यों से अलग हैं। यहां खेती मुख्य रूप से खाद्य सुरक्षा के लिए होती है, न कि अधिशेष उत्पादन के लिए। उनका मानना है कि केरल न तो अधिशेष चावल उत्पादन वाला राज्य है और न ही केंद्रीय भंडार में अतिरिक्त स्टॉक का कारण, इसलिए इसे अन्य राज्यों के साथ जोड़कर देखना गलत होगा।
राज्य सरकार का जवाब और नई चिंताएं-हालांकि बीजेपी ने राज्य सरकार पर किसानों को पर्याप्त मदद न देने का आरोप लगाया है, मुख्यमंत्री विजयन और कृषि मंत्री पी. प्रसाद पहले ही कह चुके हैं कि राज्य धान खरीद पर प्रति किलो 6.31 रुपये का अतिरिक्त बोनस देता है। विजयन ने यह भी चिंता जताई कि केंद्र का यह निर्देश भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने की दिशा में पहला कदम हो सकता है। वहीं वित्त मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि दालों, तिलहनों और मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा दिया जाए ताकि पोषण सुरक्षा और टिकाऊ खेती को मजबूती मिले।
केरल के धान किसानों को मिलने वाले अतिरिक्त बोनस को लेकर केंद्र और राज्य के बीच विवाद गहरा गया है। जहां केंद्र ने बोनस नीति की समीक्षा की मांग की है, वहीं राज्य सरकार ने इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया है। इस बहस में किसानों की आर्थिक स्थिति और कृषि नीति के भविष्य को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, जो आगे भी चर्चा का विषय बने रहेंगे।



